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कूनो नेशनल पार्क से फिर मिली बड़ी खुशखबरी, भारत में जन्मी मादा चीता ने दिया 4 शावकों को जन्म

मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर खुशखबरी आई है. यहां भारतीय मादा चीता (चीता गामिनी की बेटी) ने 4 शावकों को जन्म दिया है. केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी जानकारी. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट से मादा चीता और शावकों की तस्वीर पोस्ट कर दी बधाई. अब चार नए शावकों के जन्म के बाद कूनो में चीतों का कुनबा 57 तक पहुंच गया है जिसमें 37 चीते भारतीय हैं.

वन विभाग के अफसरों और एक्सपर्ट की टीम इन पर कड़ी नजर रखे हुए है. सीसीटीवी और मैदानी निगरानी के माध्यम से शावकों की सुरक्षा की जा रही है और उनके स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जा रहा है.

केंद्रीय पर्यावरण,वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सबसे पहले सोशल मीडिया पर इसकी खुशखबरी दी. उन्होंने शावकों की फोटो को पोस्ट कर लिखा है कि कूनो में माइलस्टोन मोमेंन्ट

एक ऐतिहासिक पल सामने आया जब 25 महीने की भारतीय मूल की मादा चीता गामिनी की बेटी ने जंगल में चार शावकों को जन्म दिया है.

यह प्रजनन इस बात का पुख्ता सबूत है कि चीते न केवल भारत के वातावरण में ढल गए हैं, बल्कि उनकी अगली पीढ़ी भी पूरी तरह स्वस्थ और प्रजननक्षम है. यह जन्म किसी बाड़े में नहीं, बल्कि खुले जंगल में हुआ है, जो प्रोजेक्ट चीता का प्राथमिक लक्ष्य था.

पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि यह प्रोजेक्ट के मुख्य मकसद कुदरती हालात में जिंदा रहना और ब्रीडिंग को पाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. उन्होंने आगे कहा कि यह कामयाबी कूनो के मैनेजरों, जानवरों के डॉक्टरों और फील्ड स्टाफ की लगन और बिना थके कोशिशों का सबूत है. यह देश के लिए गर्व का पल है. सभी को दिल से बधाई.

CM यादव ने जताई खुशी

प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस मौके पर खुशी जताई. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर यादव ने लिखा, ”अब मध्यप्रदेश चीतों के ‘पुनरुद्धार’ का भी मुख्य केंद्र बन रहा है. ‘गामिनी’ से जन्मी भारतीय मूल की 25 माह आयु की मादा चीता द्वारा खुले जंगलों में 4 शावकों को जन्म देना इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश की धरती चीतों के वंश विस्तार के लिए पूरी तरह अनुकूल है. प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सफल हो रही है. कूनो के प्रबंधकों और वन्यजीव चिकित्सकों को बहुत-बहुत बधाई.”

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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