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ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में शुरू की UPSC की तैयारी, रोजाना 4-5 घंटे पढ़ाई, पहले ही प्रयास में बनीं IFS

आज के दौर में सरकारी नौकरी में सफलता हासिल करना इतना आसान नहीं रह गया है और खासकर यूपीएससी किसी चुनौती से कम नहीं है. कुछ लोग लंबे समय तक मेहनत करने के बावजूद अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते, जबकि कुछ सही दिशा और समर्पण के दम पर कम उम्र में ही बड़ी उपलब्धि हासिल कर लेते हैं. हिमाचल प्रदेश की मुस्कान जिंदल उन्हीं में से एक हैं, जिन्होंने महज 22 साल की उम्र में ही अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली. वह चाहतीं तो आईएएस अधिकारी बन सकती थीं, लेकिन उन्होंने आईएएस के बजाय भारतीय विदेश सेवा यानी आईएफएस (IFS) को चुना.मुस्कान बचपन से ही पढ़ाई में तेज थीं. उन्होंने शुरुआती दिनों में ही तय कर लिया था कि उन्हें सिविल सेवा में ही जाना है. उन्होंने 12वीं कक्षा में शानदार 96 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी मेहनत और काबिलियत का शानदार परिचय दिया और उसके बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ चली गईं, जहां एस.डी. कॉलेज से उन्होंने बीकॉम (ऑनर्स) किया. कॉलेज के दौरान भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा था और उन्होंने ग्रेजुएशन में टॉप किया था

ऑल इंडिया 87वीं रैंक से हासिल की सफलता

अपने ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में ही उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी. रोजाना 4 से 5 घंटे पढ़ाई कर वह अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ती रहीं. हालांकि ग्रेजुएशन के तुरंत बाद उम्र कम होने की वजह से वह यूपीएससी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकीं, लेकिन उन्होंने इस समय का सही उपयोग करते हुए अपनी तैयारी पर फोकस किया. फिर साल 2019 में मुस्कान ने पहली बार यूपीएससी परीक्षा दी और पहले ही अटेंप्ट में सफलता हासिल कर ली. उन्होंने ऑल इंडिया 87वीं रैंक हासिल की और भारतीय विदेश सेवा (IFS) में चली गईं.

मोबाइल और इंटरनेट का किया सही इस्तेमाल

आईएफएस मुस्कान जिंदल की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनका अनुशासन और सेल्फ कंट्रोल रहा. उन्होंने मोबाइल और इंटरनेट का सही तरीके से उपयोग किया और पढ़ाई के दौरान ध्यान भटकने नहीं दिया. साथ ही पढ़ाई और मानसिक संतुलन के बीच भी अच्छा तालमेल बनाकर रखा. मुस्कान की इस उपलब्धि में उनके परिवार का भी अहम योगदान रहा. उनके माता-पिता ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और हर कदम पर उनका साथ दिया. आज मुस्कान न सिर्फ एक आईएफएस अधिकारी हैं, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बन चुकी हैं.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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