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दुश्मन की सीमा में विमान क्रैश होने पर कैसे जान बचाते हैं अमेरिकी पायलट? इस तरह दी जाती है ट्रेनिंग

नई दिल्ली। जब भी अमेरिकी सेना का कोई विमान किसी दुश्मन या खतरनाक क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त होता है, तो अमेरिकी सेना तुरंत एक बेहद जटिल और सुनियोजित ऑपरेशन शुरू कर देती है। इस मिशन का मकसद केवल पायलट की जान बचाना ही नहीं, बल्कि विमान में मौजूद गुप्त तकनीक को दुश्मन के हाथ लगने से रोकना भी होता है।इन मिशनों की रूपरेखा पर्सनेल रिकवरी जॉइंट पब्लिकेशन से आती है, जो दो प्रमुख अनिवार्यताओं को रेखांकित करती है। सबसे पहले विमान चालक दल की सुरक्षा करना और फिर संवेदनशील प्रणालियों को सुरक्षित करना।

एक बार जब कोई विमान हमले का शिकार होता है या दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है, तो पहले से तैनात रिकवरी टीमें लगभग तुरंत सक्रिय हो सकती हैं।इसके बाद जो शुरू होता है वह एक बहुस्तरीय बचाव अभियान है, जिसमें विशेष अभियान बलों से लेकर हवाई निगरानी प्लेटफॉर्मों तक सब कुछ शामिल होता है। ये सभी विषम और शत्रुतापूर्ण परिस्थितियों में काम करते हैं ताकि दुश्मन से पहले पायलट तक पहुंचा जा सके।

यदि कोई पायलट विमान से सुरक्षित बाहर निकल आता है और जीवित बच जाता है, तो उनका प्राथमिक उद्देश्य पकड़े जाने से बचना होता है। क्रू सदस्य अपनी तैनाती से पहले सीखे गए जीवन रक्षा कौशल पर भरोसा करते हैं, जिसमें छिपे रहना, मित्र सेनाओं के साथ नियंत्रित संपर्क बनाना और ऐसे तरीकों से आगे बढ़ना शामिल है जिससे पकड़े जाने की संभावना कम हो सके।

पीआरजेपी इस तैयारी के महत्व को समझातेदुश्मन की सीमा में विमान क्रैश होने पर कैसे जान बचाते हैं अमेरिकी पायलट? इस तरह दी जाती है ट्रेनिंग हुए कहता है कि सैन्य कमांडर रिकवरी ऑपरेशन्स की योजना इस तरह बनाते हैं जिससे सैनिकों को अकेले फंसने जैसी स्थितियों से निपटने की ट्रेनिंग मिले।

वे यह सुनिश्चित करते हैं कि उनकी टीम सैनिकों को सुरक्षित वापस लाने में सक्षम हो और स्टाफ बनी-बनाई योजनाओं के अनुसार तुरंत कार्रवाई करे, ताकि किसी की जान न जाए और सैनिकों को पकड़े जाने या उनके शोषण से बचाया जा सके।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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