उत्तर प्रदेश के बस्ती में अयोध्या जा रही एक कार से पहले रसीद काटकर 200 रुपए फिर वापसी में दोबारा फास्टैग से 100 रुपए टोल टैक्स लिया जाना महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा, सदस्य अजय प्रकाश सिंह की पीठ ने सड़क परिवहन मंत्रालय और टोल प्लाजा को सेवाओं में लापरवाही के लिए दोषी मानते हुए 2 लाख 45 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। टोल प्लाजा को अधिक वसूले गए 100 रुपये भी ब्याज सहित वापस लौटाने होंगे।बस्ती के कप्तानगंज थानाक्षेत्र के ऐंठी गांव निवासी विजय कुमार त्रिपाठी ने चौकड़ी टोल प्लाजा सहित सात लोगों के विरुद्ध जिला उपभोक्ता आयोग में अरविंद कुमार चौधरी के माध्यम से परिवाद दाखिल किया था। घटना के तथ्यों के अनुसार विजय कुमार चार नवंबर 2024 को अपनी बेटी के शैक्षिक प्रपत्र प्रस्तुत करने के लिए कार से अयोध्या जा रहे थे। उन्होंने हरैया थाना क्षेत्र में स्थित टोल प्लाजा के कर्मचारियों से लोकल होने का लाभ देने के लिए कहा और अपना आधार कार्ड दिखाया। कर्मचारियों ने लोकल मानने से इन्कार कर दिया।इस पर विजय कुमार त्रिपाठी ने फास्टैग से टैक्स काट लेने को कहा तो कर्मचारियों ने फास्टैग खराब होने का हवाला दिया। तब मजबूरन उन्होंने 200 रुपये का भुगतान दिया और कर्मचारियों से इसकी रसीद ले ली। अयोध्या से वापसी में फास्टैग से दोबारा 100 रुपये टोल टैक्स काट लिया गया। अदालत में परिवाद प्रस्तुत करते हुए परिवादी द्वारा कहा गया कि जानबूझकर परेशान और अपमानित करने के उद्देश्य से दोगुना टोल टैक्स वसूला गया था। उन्होंने अपने आरोप के पक्ष में कई तर्क दिए।पूरे मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने माना कि टोल टैक्स अदा करने के बाद भी परिवादी के खाते में 1737 रुपए शेष थे। इससे स्पष्ट है कि उनका फास्टैग खराब नहीं था बल्कि जानबूझकर कर्मचारियों द्वारा खराब बताया गया। आयोग द्वारा यह भी माना गया कि प्रायः जनपदों में स्थानीय लोगों को लोकल होने का लाभ दिया जाता है। इस प्रकार परिवादी ने लोकल का लाभ लेने के लिए पर्याप्त साक्ष्य दिया था। जानबूझकर उन्हें लोकल होने का लाभ नहीं दिया गया।
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