जमशेदपुर. आमतौर पर पॉलीहाउस का इस्तेमाल सब्जियां और पौधे उगाने के लिए किया जाता है, लेकिन जमशेदपुर के एक प्रगतिशील किसान ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. उन्होंने अपने पॉलीहाउस को खेती के बजाय कंपोस्ट खाद बनाने का केंद्र बना दिया है. उनकी यह अनोखी पहल आज न सिर्फ चर्चा में है, बल्कि कई किसानों के लिए प्रेरणा भी बन रही है.
सिलाई सोए ने बताया कि उन्होंने अपने पॉलीहाउस के अंदर 5 से 6 बेड तैयार किए हैं. इन बेड्स में गोबर और केंचुओं की मदद से वर्मी-कंपोस्ट तैयार किया जाता है. यह पूरी प्रक्रिया बेहद वैज्ञानिक और प्राकृतिक है, जिसमें किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता. करीब 3 महीने के भीतर उच्च गुणवत्ता वाली कंपोस्ट खाद तैयार हो जाती है.
समय-समय पर करें पानी का छिड़काव
कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया भी काफी सरल लेकिन प्रभावी है. सबसे पहले गोबर को अच्छी तरह से इकट्ठा कर बेड में फैलाया जाता है. इसके बाद उसमें केंचुए छोड़े जाते हैं, जो धीरे-धीरे गोबर को तोड़कर उसे पोषक तत्वों से भरपूर खाद में बदल देते हैं. नमी बनाए रखने के लिए समय-समय पर पानी का छिड़काव किया जाता है और पॉलीहाउस होने के कारण तापमान भी नियंत्रित रहता है, जिससे कंपोस्ट जल्दी और बेहतर गुणवत्ता की बनती है.
इस खाद की खासियत यह है कि यह पूरी तरह जैविक होती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसलों की पैदावार भी बेहतर होती है. किसान बताते हैं कि उनकी तैयार कंपोस्ट बाजार में करीब 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से आसानी से बिक जाती है. खास बात यह है कि इसकी मांग सिर्फ आसपास ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी आने लगी है.
टिकाऊ खेती की दिशा में एक मजबूत कदम
इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच अलग हो, तो खेती में भी नए प्रयोग कर बेहतर कमाई की जा सकती है. पॉलीहाउस का ऐसा उपयोग न केवल लागत को कम करता है, बल्कि कम समय में अधिक मुनाफा भी देता है. आज यह किसान अपने काम से न सिर्फ आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी जैविक खेती और कंपोस्ट निर्माण के लिए प्रेरित कर रहे हैं. उनकी यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ टिकाऊ खेती की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है.




