रोहतास एवं नौहट्टा प्रखंड में जल संकट गहराता जा रहा है। सोन नदी का पानी जहां आठ जिलों की प्यास बुझा रहा है, वहीं नौहटा रोहतास के किसान एक-एक बूंद को तरस रहे हैं। पहाड़ी नदियों का पानी हर साल बेकार बह जाता है, लेकिन जल संरक्षण के लिए अब तक कोई जलाशय नहीं बना। नौहटा में 30 प्रतिशत भूमि पर ही पटवन की व्यवस्था, बाकी का इलाका सूखा रहता है। नौहट्टा प्रखंड का कुल क्षेत्रफल 97,49,740 एकड़ है। इसमें से कृषि योग्य भूमि 29,46,280 एकड़ है। प्रखंड में वन क्षेत्र 35,94,460 एकड़ है। लेकिन सिंचाई की व्यवस्था सिर्फ 30 प्रतिशत भूमि पर है। यानी लगभग 32 लाख एकड़ में से सिर्फ 30% खेतों तक ही पानी पहुंच पाता है, वो भी निजी संसाधनों से। मई का आधा महीना बीत चुका है, मगर 10% किसान ही धान का बीज डालने के तैयारी में जुटे है। जिनके पास डीजल पंप या बिजली के मोटर पंप हैं, वहीं किसी तरह खेतों में पानी डाल रहे हैं। सिंचाई के लिए जमीन में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने से किसान निजी साधनों की बदौलत भी धान की बिचड़ा नहीं डाल पा रहे हैं।
नौहट्टा प्रखंड में वन क्षेत्र 35,94,460 एकड़ है। इसमें भी मात्र 30 प्रतिशत भूमि में ही सिंचाई की व्यवस्था अब तक की जा सकी है। वह भी निजी सिंचाई के साधन से। इस तरह इस प्रखंड में सिर्फ 30 प्रतिशत भूमि ही सिंचित हो पाती है। किसान खेती आकाशवर्षा वर्षा और निजी मोटर पंप, डीजल पंप के सहारे ही कर रहे हैं। इस प्रखंड में वर्ष 1985-86 में 27 उदवह सिंचाई योजनाओं का काम आधा-अधूरा पड़ा हुआ है। इन योजनाओं के निर्माण पर लघु सिंचाई विभाग द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन आज तक एक इंच भूमि की भी सिंचाई इन सिंचाई योजनाओं से नहीं हो रही है। तमाम योजनाएं बंद पड़ी हुई हैं।नौहटा प्रखंड के बरैचा गांव में सनहा नाला पर जलाशय एवं रोहतास प्रखण्ड अंतर्गत कोड़ियारी गांव में कैमूर पहाड़ी से निकलने वाली अवसानी नदी पर जलाशय बनाने का मामला वर्षों से प्रस्तावित है। जलसंसाधन विभाग के अभियंताओं द्वारा कई बार सर्वे भी किया गया।वर्ष 2012 में अभियंताओं के दल ने कैमूर पहाड़ी से निकलने वाली अवसानी, सनहा, महदेव खोह, सभी खोह आदि कई पहाड़ी नदियों का गहन सर्वेक्षण किया था। इन पहाड़ी नदियों में कितना पानी बरसात के दिनों में आता है उसकी संभावना भी तलाशी गई थी। स्टडी रिपोर्ट भी तैयार की गयी थी।





