सपने देखने और उन्हें पूरा करने का जज्बा हो, तो उम्र भी कभी बाधा नहीं बनती। इसका प्रेरणादायक उदाहरण ऊना निवासी संजीव अग्निहोत्री पेश कर रहे हैं। अभियांत्रिकी की पढ़ाई करने के बाद लोक निर्माण विभाग से अधिशासी अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हो चुके संजीव अग्निहोत्री साठ से अधिक बसंत देख चुके हैं, लेकिन शिक्षा के प्रति उनका जुनून आज भी बरकरार है। उन्होंने हिमकैप्स लॉ कालेज, बढ़ेडा में एलएलबी में दाखिला लेकर नई शुरुआत की है। इस उम्र में नियमित कक्षाओं में बैठकर पढ़ाई करना और परीक्षाओं की तैयारी करना उनके मजबूत इरादों को दर्शाता है। संजीव अग्निहोत्री का मानना है कि शिक्षा प्राप्त करने की कोई निर्धारित उम्र नहीं होती।
उनका कहना है कि कानून का ज्ञान हर व्यक्ति के लिए जरूरी है और इसी सोच के साथ उन्होंने एलएलबी करने का निर्णय लिया। फिलहाल उनका पहला सेमेस्टर पूरा हो चुका है और वह दूसरे सेमेस्टर की तैयारी में जुटे हुए हैं। संजीव अग्निहोत्री की बेटी डाक्टर के रूप में सेवाएं दे रही हैं, जबकि बेटा आईआईटी से अभियांत्रिकी में स्नातक करने के बाद एक निजी कंपनी में सेवाएं दे रहा है। उनकी यह पहल उन लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रही है, जो उम्र के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। संजीव अग्निहोत्री का कहना है कि यदि मन में सीखने की लगन हो, तो जीवन के किसी भी पड़ाव पर नई शुरुआत की जा सकती है।
समाजसेवा में आगे
सेवानिवृत अधिशासी अभियंता संजीव अग्निहोत्री समाजसेवा में भी अग्रणी रहे है। वह हिमोत्कर्ष स्वयंसेवी संस्था व रोटरी इंटरनेशनल जैसी समाजसेवी संस्थाओं के साथ पीडि़त मानवता की सेवा में अग्रसर हैं। सेवाभाव के साथ शिक्षा के लिए भी समय निकालना प्रेरणादायक है।




