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जबरन धर्मांतरण को लेकर छत्तीसगढ़ में कितना सख्त होने वाला है कानून? नए बिल को कैबिनेट से मिली मंजूरी

छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार जबरन धर्मांतरण के खिलाफ अपने पुराने कानून को और सख्त करने की तैयारी कर रही है. मंगलवार को छत्तीसगढ़ की कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ फ्रीडम ऑफ रिलीजन बिल 2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है. यह फैसला रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में लिया गया.

मीटिंग के बाद कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए डिप्टी सीएम अरुण साओ ने कहा कि प्रस्तावित कानून का मकसद जबरदस्ती, लालच, धोखाधड़ी या झूठ बोलकर किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकना हैउन्होंने कहा कि इससे धर्मांतरण से जुड़ा मौजूदा कानून और मजबूत होगा. सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून यह सुनिश्चित करना चाहता है कि धर्मांतरण का काम जबरदस्ती, पैसे देकर या किसी लालच में न किया जाए.राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि इस कानून का मकसद लोगों को धर्म बदलने के लिए दबाव डालने से बचाना है और यह सुनिश्चित करना है कि धर्मांतरण लोगों की मर्जी से हो. इस बिल में गैर-कानूनी तरीके से धर्मांतरण करवाने पर दोषी पाए जाने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया जाएगा. अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित कानून के तहत जो लोग अपना धर्म बदलना चाहते हैं, उन्हें एक औपचारिक घोषणा या वेरिफिकेशन प्रोसेस से गुजरना पड़ सकता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि धर्म उनकी मर्जी से बदला जा रहा है या नहीं.

राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ

धर्म बदलने का मुद्दा कई राज्यों में, खासकर   के कुछ हिस्सों जैसे आदिवासी-बहुल इलाकों में राजनीतिक रूप से एक संवेदनशील विषय रहा है. सत्ताधारी सरकार ने बार-बार चिंता जताई है कि कभी-कभी लालच देकर या धोखे से धर्म बदलवाए जाते हैं.

हालांकि, विपक्षी पार्टियों और सिविल सोसाइटी ग्रुप्स ने अक्सर यह तर्क दिया है कि ऐसे कानूनों को ध्यान से लागू किया जाना चाहिए ताकि यह पक्का हो सके कि वे व्यक्तिगत विश्वास और धर्म की आजादी पर रोक न लगाए, जो संविधान के तहत सुरक्षित है.

कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इस बिल को विधानसभा में पेश किया जाएगा. एक बार पास होने के बाद नया कानून राज्य में धर्मांतरण से जुड़े मामलों को रेगुलेट करने के तरीके को काफी हद तक बदल सकता है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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