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बुढ़ापा हो तो ऐसा! रिटायरमेंट के बाद शुरू की नई जिंदगी, 68 की उम्र में खोला क्लाउड किचन, प्रदीप झा हैं इंस्पिरेशन

रांची. प्रदीप कुमार झा एक निजी कंपनी में जनरल मैनेजर के पद पर काम करते थे. 8 साल पहले रिटायर हुए हैं. प्रदीप बताते हैं कि कुकिंग का उन्हें इतना जबरदस्त शौक था कि रिटायरमेंट के बाद भी कई नौकरी के ऑफर आए, लेकिन उन्होंने सबको ठुकराकर खाना बनाना चुना. आज वे क्लाउड किचन की तरह खाना बनाकर अपने शौक को आगे बढ़ा रहे हैं. इससे वे ना केवल व्यस्त रहते हैं, कमाते भी हैं और शौक को काम बनाने से खुश भी रहते हैं.

बिजी रहेंगे तो फिट रहेंगे
आज स्थिति यह है कि एक बार कोई उनके हाथ का खाना खा ले, तो वह उनका पक्का ग्राहक बन जाता है. इससे रिटायरमेंट के बाद उनका मन भी लगा रहता है, सेहत भी ठीक रहती है और चाहें तो अच्छी कमाई भी हो जाती है. आज वे उतने ही व्यस्त रहते हैं जितना जनरल मैनेजर के तौर पर रहते थे. उनका मानना है कि अगर आप व्यस्त रहते हैं तो फालतू विचार मन में नहीं आते और आप फिट रहते हैं.

रिटायरमेंट के बाद खाली नहीं बैठे
प्रदीप बताते हैं कि किसी भी व्यक्ति को रिटायरमेंट के बाद खाली नहीं बैठना चाहिए. कई बार लोगों को लगता है कि रिटायरमेंट का मतलब है कि अब कोई काम नहीं करना है. ऐसा नहीं है. रिटायरमेंट का मतलब सिर्फ इतना है कि एक कंपनी में आपकी जिम्मेदारी खत्म हुई है. बस, इससे अधिक नहीं.

इसके बाद हर व्यक्ति का अपना एक निजी शौक होता है, जिसे वह जिंदगी की भागदौड़ में पूरा नहीं कर पाता. रिटायरमेंट का समय वही सुनहरा मौका होता है, जब आप अपने उस शौक को पूरा कर सकते हैं.

अपनी मां से मिली कुकिंग की कला
इसके अलावा वे गार्डनिंग और ट्रैवलिंग भी करते हैं. तरह-तरह की खाद अपने घर में ही बनाते हैं. कुकिंग के बारे में वे कहते हैं कि सुबह से ही किचन में लग जाते हैं. अगर घर में 25 मेहमान भी आ जाएं, तो सभी के लिए खाना वही बनाते हैं. वे किचन में किसी को आने नहीं देते. मसाले पीसने से लेकर हर एक स्वाद उनके हाथ का होता है. उनकी मां को भी खाना बनाने का बहुत शौक था और वे मानते हैं कि यह गुण उन्हें अपनी मां से ही मिला है.

रिटायरमेंट के बाद जिंदगी और भी खूबसूरत
उन्होंने बताया कि रिटायरमेंट के बाद जिंदगी और भी खूबसूरत हो गई है. क्योंकि अब वे वही करते हैं जिसमें उनका मन लगता है, दिल लगता है. उनका कहना है कि रिटायरमेंट के बाद हर व्यक्ति को कोई न कोई ऐसा काम जरूर चुनना चाहिए, जिसमें उसे आनंद मिले. चाहे उससे कमाई हो या न हो, यह जरूरी नहीं. अगर व्यक्ति ऐसा करता है तो वह स्वस्थ और फिट रहता है और समाज पर बोझ नहीं, बल्कि संपत्ति बनकर रहता है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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