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स्वतंत्रता दिवस समारोह में उल्टा झंडा फहराने पर दर्ज FIR रद्द, हाईकोर्ट ने कहा- अनजाने में हुई गलती

कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान गलती से उल्टा झंडा फहराने के लिए पंचायत अधिकारी के खिलाफ दर्ज FIR यह कहते हुए रद्द की कि यह अधिकारी की अनजाने में हुई गलती थी।

जस्टिस राजेश के राय ने अपने ऑर्डर में कहा:

“जैसा कि रिकॉर्ड से पता चला, शिकायत के कंटेंट से पता चलता है कि याचिकाकर्ता को 15.08.2021 को झंडा फहराने समारोह के लिए ऑफिसर के तौर पर तैनात किया गया। हालांकि, उसने लापरवाही से बिना कोई सही सावधानी बरते, झंडा उल्टा फहरा दिया और वह गलती से फहरा दिया गया। इसके अलावा, चार्जशीट मटीरियल की ध्यान से जांच करने पर सभी गवाहों ने कहा कि यह घटना सिर्फ याचिकाकर्ता की लापरवाही की वजह से हुई और उसका इरादा या कोई गलत मकसद राष्ट्रीय झंडे का अपमान करना नहीं था।”

कोर्ट ने कहा कि ऐसे ही एक मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आनंद तिवारी बनाम स्टेट ऑफ़ मध्य प्रदेश में कहा कि कोई भी समझदार इंसान, खासकर जिसके निजी फायदे ऐसी गलती से बिल्कुल भी प्रभावित नहीं होते, यह नहीं मानेगा कि कोई ऑफिसर जानबूझकर नेशनल फ्लैग को उल्टा फहराएगा और इस तरह खुद को मुसीबत में डाल लेगा।

कोर्ट ने कहा,

“जैसा कि ऊपर बताया गया, चार्जशीट की बातों को देखने पर यह पता चलता है कि याचिकाकर्ता-आरोपी का काम अनजाने में हुआ और यह सिर्फ गलती से हुआ। ऐसे हालात में एक्ट, 1971 की धारा 2 के तहत प्रावधान याचिकाकर्ता के खिलाफ नहीं बनता। क्योंकि, याचिकाकर्ता ने न तो राष्ट्रीय झंडा का अपमान किया और न ही जानबूझकर राष्ट्रीय झंडा को केसरिया साइड नीचे करके फहराया।”

शिकायत करने वाले – चित्तपुर तालुक के अलोली गांव के पंचायत डेवलपमेंट ऑफिसर ने शिकायत दर्ज कराई कि याचिकाकर्ता/आरोपी नंबर 1, जो अलोली ग्राम पंचायत में सेकंड डिवीज़न असिस्टेंट (SDA) है, स्वतंत्रता दिवस यानी 15.08.2021 को झंडा फहराने का इंचार्ज था। आरोप है कि याचिकाकर्ता की लापरवाही की वजह से, गलती से राष्ट्रीय झंडा उल्टा फहरा दिया गया। केस दर्ज किया गया और बाद में चार्जशीट फाइल की गई और मजिस्ट्रेट कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल ऑनर्स एक्ट की धारा 2 के तहत अपराध का संज्ञान लिया। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने केस रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि शिकायत से पता चलता है कि एक चूक और गलती की वजह से झंडा गलती से यानी उल्टी स्थिति में फहराया गया। उन्होंने आगे कहा कि याचिकाकर्ता एक सरकारी कर्मचारी है, जो राष्ट्रीय झंडे का बहुत सम्मान करता है। सरकारी वकील ने कहा कि जांच के दौरान यह पता चला है कि याचिकाकर्ता सरकारी कर्मचारी होने के नाते, लापरवाही से राष्ट्रीय झंडा को गलत तरीके से दिखाया और इस तरह राष्ट्रीय झंडा की पवित्रता का अपमान किया।

कोर्ट ने कार्रवाई रद्द करते हुए अर्जी मंजूर की।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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