अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फ़ैसला सुनाया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वैश्विक टैरिफ़ अवैध है.
ट्रंप प्रशासन की एक अहम नीति पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है.
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने फ़ैसला 6-3 के बहुमत से दिया है. यानी छह जजों ने टैरिफ़ को अवैध बताया और तीन इससे असहमत थे.
ट्रंप अमेरिकी व्यापार समझौतों को नए सिरे से करने के लिए दुनिया भर में टैरिफ़ को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे.
ट्रंप ने विदेशी सामान आयात करने वाली कंपनियों से दसियों अरब डॉलर वसूलने के लिए आक्रामक रूप से इसका इस्तेमाल किया था.
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सरकार को पहले से वसूले गए टैरिफ़ राजस्व को वापस करना होगा या नहीं. कहा जा रहा है कि इस मुद्दे पर अदालत की चुप्पी से नई अनिश्चितता पैदा हो गई.
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले ने टैरिफ़ से वसूले जा चुके राजस्व पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. जजों ने यह मुद्दा नहीं सुलझाया कि आयातकों को रिफंड का अधिकार है या नहीं और इस पर निर्णय निचली अदालत पर छोड़ दिया.
ने रिफंड को संभालने के तरीक़े पर गाइडलाइन न देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की. ट्रंप ने कहा, “इस पर चर्चा नहीं हुई. यह मामला सालों अदालत में चलता रहेगा.”
अमेरिकी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग के अनुसार, रिफंड की राशि 170 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है जो ट्रंप के टैरिफ़ से हासिल कुल राजस्व के आधे से ज़्यादा है. इसके बावजूद, ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि क़ानूनी फ़ैसले के बावजूद 2026 में टैरिफ़ से हासिल राजस्व में कोई बदलाव नहीं होगा.
ट्रंप ने पीछे हटने से इनकार किया है. शुक्रवार रात उन्होंने कहा कि अन्य क़ानूनी अधिकारों के आधार पर नया 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं.
ट्रंप ने कहा, “हम पीछे नहीं हटेंगे. हम और ज़्यादा पूंजी जुटाएंगे.”
लगभग सभी देशों पर लगाए गए 10 प्रतिशत के बेसलाइन टैरिफ़ और कुछ देशों पर लगाए गए अधिक दरों वाले टैरिफ रद्द हुए हैं. मेक्सिको, कनाडा और चीन के ख़िलाफ़ उसी क़ानूनी आधार पर लगाए गए टैरिफ़ भी अमान्य ठहराए गए.
अन्य क़ानूनी प्रावधानों के तहत लगाए गए टैरिफ़ प्रभावित नहीं हुए. छोटे व्यवसायों ने दलील दी कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट में टैरिफ़ का उल्लेख नहीं है और आयात पर टैरिफ़ लगाने की शक्ति संविधान के अनुसार, केवल कांग्रेस के पास है.
ट्रंप के पास कुछ विकल्प हैं. जैसे सेक्शन 232 जैसे राष्ट्रीय-सुरक्षा प्रावधानों के तहत उद्योग-विशेष टैरिफ़ जारी रह सकते हैं.
ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत अस्थायी वैश्विक टैरिफ़ और सेक्शन 301 के तहत देश-विशेष टैरिफ़ जैसे विकल्पों पर बढ़ने का फ़ैसला किया
भारत के साथ हुई ट्रेड डील पर क्या असर पड़ेगा?
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के तुरंत बाद हुई प्रेस कॉन्फ़्रेंस में भारत के साथ हुई ट्रेड डील पर पर क्या असर पड़ेगा के सवाल का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा “कुछ भी नहीं बदला है. भारत टैरिफ़ का भुगतान करेगा. हम टैरिफ़ का भुगतान नहीं करेंगे.”
ट्रंप ने कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, यह पहले जैसा था, उससे उलट है. यानी ट्रंप कह रहे थे कि पहले अमेरिका टैरिफ़ देता था, अब भारत टैरिफ़ देगा.
ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कहा कि वह बहुत अच्छे हैं लेकिन हमसे ज़्यादा चार्ज कर रहे थे.
ट्रंप ने कहा, ”हमने भारत के साथ एक समझौता किया और अब यह एक निष्पक्ष समझौता है. हम उन्हें टैरिफ का भुगतान नहीं कर रहे हैं. अब भारत टैरिफ़ का भुगतान कर रहा है. हमने मामला पलट दिया है.”
भारत और अमेरिका में हुई ट्रेड डील की शर्तों के तहत अमेरिका में जाने वाले भारतीय सामान पर सामान्य टैरिफ़ दर 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह शुक्रवार को अमेरिका के ट्रेड एक्ट (1974) के सेक्शन 122 का उपयोग करते हुए व्यापक 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ़ पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसके तीन दिनों में प्रभावी होने की उम्मीद है.
ये टैरिफ़ अधिकतम 150 दिनों के लिए वैध होंगे. उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि सेक्शन 232 के तहत लगाए गए टैरिफ़, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लगाए जाते हैं (मिसाल के तौर पर स्टील और एल्युमिनियम पर) और सेक्शन 301 के टैरिफ़ (‘अनुचित’ व्यापार नियम से संबंधित) लागू रहेंगे. हालांकि, भारत पर पूरे 18 प्रतिशत टैरिफ़ दर के लिए क़ानूनी आधार अभी स्पष्ट नहीं है.
भारत के साथ अपने संबंधों के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने पीएम मोदी को शानदार बताया और कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री के साथ उनका संबंध बहुत अच्छा है.





