शाहजहांपुर. आम की बागवानी किसानों के लिए एकबार मोटी लागत लगा कर बाद में सालों तक कमाई का जरिया है. फलों का राजा कहा जाने वाला आम न केवल स्थानीय बाजारों में बल्कि इसका निर्यात भी बड़े पैमाने पर होता है. लेकिन, अच्छा उत्पादन और लाभ लेने के लिए बागों की सही समय पर देखभाल और वैज्ञानिक प्रबंधन जरूरी है. किसान अपने बाग में स्वच्छता बनाए रखें और नियमित अंतराल पर पेड़ों का निरीक्षण करें. सही समय पर कीटनाशकों का प्रयोग और खरपतवार का नियंत्रण न केवल फसल की गुणवत्ता सुधारता है, बल्कि किसानों की आय में भी बड़ा इजाफा होता है.
कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात कृषि एक्सपर्ट डॉ हादी हुसैन खान ने बताया कि आम की खेती में सबसे बड़ी चुनौती कीटों और फफूंद जनित रोगों का प्रबंधन है. ‘भुनका’ जैसे कीट और ‘पाउडरी मिल्ड्यू’ जैसी बीमारी पूरी फसल को तबाह कर सकती हैं. भुनका कीट अक्सर खरपतवारों में शरण लेते हैं और बाद में पेड़ों पर हमला करते हैं. वहीं, पाउडरी मिल्ड्यू पत्तियों पर सफेद परत बनाकर प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को रोक देता है, जिससे फल कम आते हैं. इन चुनौतियों से निपटने के लिए रसायनों का संतुलित प्रयोग और बागों की साफ-सफाई अत्यंत महत्वपूर्ण है. जानकारी और सही तकनीकी जानकारी के अभाव में उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है.
खरपतवार और भुनका कीट का नियंत्रण
आम के बगीचों में खरपतवारों का होना भुनका कीट को सीधा आमंत्रण देने जैसा है. ये अनावश्यक पौधे कीटों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन जाते हैं, जहां से वे निकलकर आम के पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं. यदि बगीचे में भुनका कीट दिखाई दें, तो इमिडाक्लोप्रिड या बुप्रोफेजिन का छिड़काव कर दें. अगर आप बाग में सही समय पर खरपतवार नियंत्रण कर लेते हैं तो भुनका कीट के आने की संभावना वैसे भी ना के बराबर हो जाती है.पाउडरी मिल्ड्यू और सल्फर का महत्व
पाउडरी मिल्ड्यू आम की एक गंभीर बीमारी है, जो पत्तियों और मंजरियों पर सफेद पाउडर के रूप में फैलती है. इसके कारण पेड़ों की भोजन बनाने की क्षमता कम हो जाती है और फलों का उत्पादन सीधे तौर पर प्रभावित होता है. इस समस्या के समाधान के लिए सल्फर 80% का छिड़काव करें. किसानों को चाहिए कि वे लक्षणों के दिखते ही दवा का घोल बनाकर छिड़काव करें, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके और भरपूर पैदावार सुनिश्चित हो





