नईदिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का फैसला किया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की है कि एमपीसी ने नीतिगत रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखने का निर्णय लिया है। इसका अर्थ है कि लोन की EMI नहीं बढ़ेगी।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जिस रेट पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। आरबीआई ने दिसंबर में ब्याज दर 0.25% घटाकर 5.25% की थीं जो कि अभी भी बरकरार रखा गया है। आरबीआई गवर्नर ने जोर देकर कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और घरेलू मुद्रास्फीति व विकास का परिदृश्य सकारात्मक है। इससे पहले साल 2025 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की बड़ी कटौती की थी।
गवर्नर ने कहा कि हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता और संभावित भारत-अमेरिका व्यापार सौदा निर्यात की गति को मजबूत समर्थन प्रदान करेंगे। आरबीआई गवर्नर ने भविष्य के आर्थिक परिदृश्य पर भरोसा जताते हुए अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के लिए विकास दर के अनुमान को संशोधित कर बढ़ा दिया है, जिसके क्रमशः 6.9% और 7% रहने की उम्मीद है। महंगाई के मोर्चे पर, चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति 2.1% रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इसके 4% और दूसरी तिमाही में 4.2% रहने की संभावना जताई गई है। वैश्विक हालात के बारे में बोलते हुए गवर्नर ने कहा कि जनवरी के अंत तक विदेशी मुद्रा भंडार 723.8 अरब डॉलर के बहुत ही स्वस्थ स्तर पर है और चालू वित्त वर्ष में चालू खाता घाटा भी ‘मध्यम’ रहने की उम्मीद है।
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