छत्तीसगढ़

क्यूआर कोड, आजीविका डबरी, युक्तधारा पोर्टल के फायदे सहित विकसित भारत जी राम जी एवं आवास निर्माण के संबंध में ग्रामीणों ने जाने अपने अधिकार

*रोजगार सह आवास दिवस में ग्रामीणों से हुआ सीधा संवाद*

*क्यूआर कोड, आजीविका डबरी, युक्तधारा पोर्टल के फायदे सहित विकसित भारत जी राम जी एवं आवास निर्माण के संबंध में ग्रामीणों ने जाने अपने अधिकार*

*पारदर्शी एवं जवाबदेही प्रशासन की ओर बढ़ते कदम*

कवर्धा,  जनवरी 2026। महात्मा गांधी नरेगा एवं प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण सहित विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही एवं पारदर्शिता के लिए लगातार नए-नए प्रयास हो रहे हैं। इसी क्रम में विगत तीन वर्षों में हुए निर्माण कार्यों की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त करने के लिए रोजगार सह आवास दिवस आयोजन के अवसर पर ग्रामीणों को क्यूआर कोड स्कैन करना सिखाया गया। ग्रामीणों को बताया गया की गांव के प्रमुख स्थानों पर लगे क्यूआर कोड को अपने मोबाइल से स्कैन करते ही महात्मा गांधी नरेगा एवं प्रधानमंत्री आवास योजना में हुए कार्यों की पूरी जानकारी मोबाइल पर ही प्राप्त हो जाएगी। इसके लिए किसी भी कार्यालय में जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
रोजगार सह आवास दिवस के अवसर पर ग्रामीणों को योजना में होने वाले निर्माण कार्य के संबंध में भी बताया गया। आजीविका डबरी निर्माण पर बताया गया कि इसके निर्माण से ग्रामीणों को एक ओर जहां रोजगार मिलेगा तो वहीं दूसरी ओर डबरी में मछली पालन से आजीविका संवर्धन होगा। डबरी के आसपास नमी से सब्जियों का उत्पादन कर इसके बिक्रि से आमदनी के नये स्त्रोत उपलब्ध होने की जानकारी दी गई। आजीविका डबरी में हितग्राहियों को मत्स्य पालन विभाग एवं उद्यानकी विभाग द्वारा ग्रामीणों को सहायता प्रदान करते हुए तकनिकी रूप से प्रशिक्षित करने की जानकारी दी गई।
कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने बताया की प्रत्येक महीने के 7 तारीख को रोजगार सह आवास दिवस का आयोजन किया जाना है, जिसमें ग्रामीणों को योजना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाती है। योजना से सामुदायिक एवं हितग्राही मूलक कार्यों, कूप निर्माण, डबरी निर्माण पशुपालन के लिए शेड निर्माण, वृक्षारोपण जैसे अनेक कार्यों के द्वारा आजीविका संवर्धन की गतिविधियों पर ग्रामीणों का ज्ञानवर्धन किया जाता है।

गांव में स्वीकृत आवास और निर्माण के संबंध में हुई चर्चा

कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने बताया कि रोजगार सह आवास दिवस पर ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत स्वीकृत हुए आवास के हितग्राहियों के नामों का वाचन कर जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें आवास निर्माण हेतु प्राप्त किश्तों, मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी भुगतान, निर्माण सामग्री की उपलब्धता तथा विभिन्न विभागों के साथ अभिसरण (कन्वर्जेन्स) के माध्यम से मिलने वाली सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा हितग्राहियों से आवास निर्माण कार्य को समय-सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने का आहवाहन किया गया।

विकसीत भारत जी राम जी से मिलेगा और अधिक रोजगार

ग्रामीणों को 125 दिनों का रोजगार, समय पर मजदूरी भुगतान,मांग आधारित रोजगार, ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास और आजीविका संवर्धन सहित अनेक जन कल्याणकारी प्रावधानों के साथ बने नए कानून विकसीत भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण, विकसित भारत जी राम जी की जानकारी रोजगार सह आवास दिवस पर दी गई। महात्मा गांधी नरेगा में होने वाले बदलाव के विषय में बताया गया। नय कानून से ग्रामीणो, श्रमिकों, महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति परिवारों सहित कमजोर समूह को होने वाले व्यापक लाभ की जानकारी दी गई।

युक्तधारा पोर्टल एवं लेबर बजट

रोजगार सह आवास दिवस के अवसर पर महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सभी निर्माण कार्यों का चयन तकनीकी पद्धति के आधार पर युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा है। यह कार्य महात्मा गांधी नरेगा के साथ राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो के संयुक्त भूवन प्लेटफार्म पर व्यापक रूप से निर्मित युक्तधारा पोर्टल से हो रहा है। इसमे जीआईएस टूल्स की सहायता से विभिन्न भौगोलिक और स्थनिक सूचनाओं को जोड़कर ग्राम पंचायत के लिए योजना बनाने की प्रक्रिया को और भी सरल और सामग्र बनाया गया है। ताकि वैज्ञानिक पद्धति से ग्रामीण क्षेत्रों का विकास किए जाने के लिए निर्माण कार्य का चयन कर योजनाएं तैयार की जा सके। इसके साथ ही आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बनाए जा रहे लेबर बजट के संबंध में ग्रामीणों से चर्चा करते हुए पंचायत में आवश्यकता अनुसार निर्माण कार्यो की पहचान की गई। 125 दिनों का गारंटीशुदा रोजगार के लिए अधिक से अधिक मजदूरी मूलक कार्यो की स्वीकृति के लिए चर्चा की गई। प्रमुख रूप से जल संरक्षण के कार्यो में अधिक रोजगार उपलब्ध होने पर ग्रामीणों ने अपने विचार रखे जिसमें बताया गया कि तालाबों का निर्माण पुरान जल स्त्रोतो से गाद निकासी के कार्य, आजीविका डबरी, कच्ची नाली निर्माण जैसे कार्यो की उपयोगिता पर व्यापर विचार-विमर्श किया गया और ऐसे कार्यो की पहचान कर भविष्य में स्वीकृत करने की बात कही गई।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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