आपने अकसर नवजात शिशु को सोते समय अकेले मुस्कुराते हुए देखा होगा। अगर आपको लगता है कि यह कोई जादू है या ईश्वर का कोई इशारा तो आपको बता दें, ऐसा बिल्कुल नहीं है। जी हां, बच्चे अक्सर सोते समय मुस्कुराते हैं, जो कि बिल्कुल सामान्य बात है। यह उन पहली प्यारी हरकतों में से एक है, जिसे माता-पिता सबसे पहले नोटिस करते हैं। लेकिन भले ही ऐसा लगे कि आपका बच्चा किसी सपने पर प्रतिक्रिया कर रहा है, लेकिन इसके पीछे का विज्ञान थोड़ा अलग है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
फोर्टिस अस्पताल की शिशु रोग विशेषज्ञ (pediatrician) डॉ. विनीत क्वात्रा कहती हैं कि नवजात शिशु अपने सोने का एक बड़ा हिस्सा ऐक्टिव स्लीप में बिताते हैं, जो बड़ों के REM (रैपिड आई मूवमेंट) नींद चरण जैसा होता है। इस दौरान उनकी सांसें अनियमित होती हैं, पलकों में हल्की हलचल होती है, शरीर में छोटे-छोटे मूवमेंट आते हैं और चेहरे पर कई तरह के भाव दिख सकते हैं, जिनमें मुस्कान भी शामिल होती है। इन मुस्कानों को रिफ्लेक्स स्माइल कहा जाता है। ये भावनाओं के कारण नहीं, बल्कि बच्चे के विकसित होते तंत्रिका तंत्र की वजह से होती हैं। रिफ्लेक्स स्माइल छोटी, अचानक और खासकर शुरुआती कुछ हफ्तों में दिखाई देती हैं।
बच्चा कब देता है सोशल स्माइल?
डॉ. विनीत क्वात्रा कहती हैं कि बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता रहता है (लगभग 6 से 8 हफ्ते की उम्र के आसपास) उसका नर्वस सिस्टम और परिपक्व होने लगता है। तब वे सोशल स्माइल देना शुरू करते हैं, जो असली भावनात्मक प्रतिक्रिया होती है। ये मुस्कान तब आती है जब बच्चा जाग रहा होता है और मां-बाप के चेहरे, आवाज या स्पर्श पर प्रतिक्रिया देता है। सोशल स्माइल ज्यादा इरादतन होती हैं, थोड़ी देर तक रहती हैं और अक्सर चमकीली आंखों या मीठी कू-कू आवाजों के साथ आती हैं।
बच्चों की शुरुआती मुस्कान
सोते समय मुस्कान तब भी दिख सकती है जब बच्चा नींद के अलग-अलग चरणों के बीच बदल रहा होता है। इन पलों में चेहरे की मांसपेशियां हल्की सी थरथरा सकती हैं या ढीली पड़ सकती हैं, जिससे एक नरम, प्यारी सी मुस्कान बन जाती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह शुरुआती मुस्कानें बच्चों को चेहरे के भावों का अभ्यास करवाती हैं, जिससे आगे चलकर वे अपने माता-पिता के साथ ज्यादा गहराई से जुड़ पाते हैं।
दिमागी विकास का संकेत है बच्चे की मुस्कुराहट
इसलिए जब भी आप अपने छोटे बच्चे को सोते समय मुस्कुराते देखें, उस पल का आनंद लें। यह उसके दिमाग के स्वस्थ विकास का संकेत है। चाहे वह हल्की-सी मुस्कान हो या चौड़ी-सी हंसी, ये शांत, नींद भरी मुस्कानें शुरुआती पेरेंटहुड का सबसे प्यारा हिस्सा हैं और यह विश्वास दिलाती हैं कि आपका बच्चा बिल्कुल ठीक तरह से बढ़ रहा है





