संसद में बजट पर चर्चा के दौरान आज यानी 11 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के दावों पर सवाल उठाए। वित्त मंत्री ने पूछा कि अगर बंगाल सरकार को आम आदमी की इतनी ही चिंता है, तो कोलकाता में पेट्रोल की कीमत दिल्ली से ₹10-11 ज्यादा क्यों है?
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को केंद्र पर आरोप लगाने के बजाय वैट कम करके जनता को राहत देनी चाहिए। अभी पश्चिम बंगाल में पेट्रोल-डीजल पर 25% वैट लगाया जाता है।
GST को लेकर टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के दावों को खारिज करते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि दूध, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं पर कोई टैक्स नहीं वसूला जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता को गुमराह करने के लिए गलत डेटा पेश किया जा रहा है।
वित्त मंत्री के भाषण की 10 बड़ी बातें…
1. ‘अंतिम संस्कार की सेवाओं पर कभी नहीं लगा GST’
वित्त मंत्री ने कहा- यह दावा कि इंसान के मरने के बाद भी GST देना पड़ता है, पूरी तरह झूठ है। फ्यूनरल सर्विसेज पर कभी कोई जीएसटी नहीं था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद बंगाल में ‘कट मनी’ सिंडिकेट मौत पर पैसा ले रहा होगा, जिसे विपक्ष जीएसटी बता रहा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि बंगाल सरकार नए व्हीकल रजिस्ट्रेशन और अन्य रोड लेवी के जरिए जनता पर बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार को वाकई महंगाई की फिक्र है, तो उन्हें वैट (VAT) की दरों में कटौती करनी चाहिए ताकि लोगों को सस्ता पेट्रोल मिल सके।
2. युवाओं और वेटनरी प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार
ग्रामीण इलाकों में पशु चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए इस साल 20 हजार से ज्यादा वेटनरी प्रोफेशनल्स के लिए जॉब के मौके पैदा किए जाएंगे। इसके लिए सरकार ‘लोन लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी स्कीम’ लेकर आई है, जिससे युवाओं को तुरंत रोजगार मिलेगा।
. टूरिज्म सेक्टर और 10,000 गाइड्स की ट्रेनिंग
सरकार ने 20 ‘आइकॉनिक टूरिज्म सेंटर्स’ बनाने का ऐलान किया है। इन केंद्रों के लिए इसी साल 10 हजार टूरिस्ट गाइड्स तैयार किए जाएंगे।
इसके लिए 12 हफ्ते की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से होगी। इससे पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
4. एग्रीकल्चर में एआई और ‘एग्री स्टैक’ का इस्तेमाल
खेती में सुधार के लिए AI आधारित ‘एग्री स्टैक’ पोर्टल तैयार किया गया है। इसमें हर किसान की जमीन, क्रॉप और मिट्टी की सेहत का डिजिटल रिकॉर्ड होगा। इससे किसानों को सही फर्टिलाइजर और अच्छी क्वालिटी के बीजों की जानकारी मिलेगी, जिससे उनकी इनकम बढ़ेगी।
5. MSME और प्रोफेशनल ट्रेनिंग हब
MSME की परिभाषा बदली गई है, ताकि बड़े होने पर भी उन्हें सरकारी फायदे मिलते रहें। इसके अलावा, देश में 5 ‘मेडिकल हब्स’ और ‘मेगा एंटरप्रेन्योरशिप बिल्डिंग सेंटर्स’ बनाए जाएंगे, जहां पढ़ाई के साथ-साथ स्किल्स और जॉब्स एक ही जगह उपलब्ध होंगी।
6. बजट के मुख्य आंकड़े और टैक्स कलेक्शन
- इस साल ग्रॉस टैक्स रिसीप्ट 44.04 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के संशोधित अनुमान (RE) से 8% ज्यादा है।
- सरकार का कुल खर्च 53.47 लाख करोड़ रुपए होने जा रहा है। इसमें से 12.22 लाख करोड़ रुपए कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए रखे गए हैं, जो GDP का 3.1% है।
7. राज्यों को वित्तीय सहायता (SASCI स्कीम)
राज्यों के वित्त मंत्रियों के सुझाव पर अमल करते हुए, सरकार ने राज्यों को दिए जाने वाले 50 साल के ब्याज मुक्त लोन (SASCI) को बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपए कर दिया है। इसे ‘इफेक्टिव कैपिटल एक्सपेंडिचर’ के तौर पर देखा जाए, तो यह कुल 17.1 लाख करोड़ रुपए (जीडीपी का 4.4%) बनता है, जो सीधे तौर पर भारत के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में काम आएगा।
8. राज्यों को उनके हिस्से का पूरा फंड ट्रांसफर
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार राज्यों को उनके हिस्से का पूरा 41% टैक्स ट्रांसफर कर रही है। अगले साल राज्यों को कुल 25.44 लाख करोड़ रुपए दिए जाएंगे, जो पिछले साल की तुलना में 2.7 लाख करोड़ रुपए ज्यादा है।
9. वित्त आयोग की रिपोर्ट और ‘सेस-सरचार्ज’ का सच
16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच पैसे के बंटवारे में पूरी पारदर्शिता है। उन्होंने समझाया कि ग्रॉस टैक्स (GTR) में से ‘सेस’ और ‘सरचार्ज’ हटाकर जो ‘नेट प्रोसीड’ बचता है, उसका 41% राज्यों को दिया जाता है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि जो ‘हेल्थ सेस’ या ‘एजुकेशन सेस’ केंद्र कलेक्ट करता है, वह पैसा भी आखिर में राज्यों में स्कूल, अस्पताल और सड़कें बनाने के लिए ही भेजा जाता है।
10. अगले 25 साल की तैयारी वाला बजट
वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट सिर्फ एक साल के लिए नहीं, बल्कि 2026 से 2050 तक की नींव रखने वाला है। सरकार बायो-फार्मा, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और ‘कार्बन कैप्चर’ जैसी कटिंग-एज टेक्नोलॉजी में निवेश कर रही है ताकि भारत 2070 तक ‘नेट जीरो’ का लक्ष्य हासिल कर सके और इन क्षेत्रों में दुनिया का लीडर बने।





