*संक्रामक रोगों एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों से प्रभावी निपटने जिला संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल का गठन*
कवर्धा, सितंबर 2026। जिले में संक्रामक रोगों के प्रकोप, मरीजों अथवा मृत्यु के असामान्य समूह, असामान्य रोग प्रस्तुति, खाद्य एवं जलजनित रोग, वाहक जनित रोग, पशुजन्य रोग, टीका रोकथाम योग्य बीमारियों, पर्यावरणीय स्वास्थ्य घटनाओं तथा अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों की समयबद्ध जांच एवं प्रभावी नियंत्रण के लिए जिला स्तर पर संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल का गठन किया गया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती तुलिका प्रजापति द्वारा 16 सितंबर 2026 को जारी आदेश के तहत गठित इस दल में स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
आदेश के अनुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दल का प्रमुख बनाया गया है। जिला टीकाकरण अधिकारी/जिला आरसीएच अधिकारी को टीका रोकथाम योग्य बीमारियों से संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है। जिला निगरानी अधिकारी को सह-प्रमुख, जिला मलेरिया अधिकारी को वाहक जनित रोग नियंत्रण की जिम्मेदारी तथा जिला महामारी विशेषज्ञ को रोग संबंधी जांच एवं विश्लेषण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा सूक्ष्म जीव विज्ञानी/रोग प्रयोगशाला विशेषज्ञ, चिकित्सा विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, जल संसाधन/लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, पशुपालन, कृषि, नगरीय निकाय/पंचायत एवं स्वच्छता, वन विभाग, पुलिस, जिला जनसंपर्क/जनजागरूकता, आपातकालीन परिवहन सेवा तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को उनकी विशेषज्ञता के अनुसार दल में शामिल किया गया है।
जिला संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल द्वारा एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच एवं एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम, स्वास्थ्य संस्थानों, मीडिया अथवा अन्य स्रोतों से प्राप्त बीमारी के प्रकोप संबंधी सूचना का सत्यापन किया जाएगा तथा आवश्यकता के अनुसार 24 घंटे के भीतर क्षेत्रीय जांच प्रारंभ की जाएगी। दल द्वारा संबंधित प्रकरण के अनुसार रोग की पहचान के लिए आवश्यक मापदंड तैयार करने, सक्रिय मरीजों की खोज, प्रभावित क्षेत्र अथवा संस्थान की मरीज सूची तैयार करने, व्यक्ति, स्थान एवं समय के आधार पर रोग संबंधी विश्लेषण करने तथा बीमारी के संभावित स्रोत, संक्रमण के माध्यम एवं प्रसार के मार्ग की पहचान करने की कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर मानव, जल, खाद्य, पर्यावरण अथवा अन्य नमूनों का समय पर संग्रह, पैकेजिंग, परिवहन एवं प्रयोगशाला जांच सुनिश्चित की जाएगी।
प्रकोप की प्रकृति के अनुसार तत्काल नियंत्रण एवं रोकथाम के उपाय लागू किए जाएंगे तथा प्रभावित व्यक्तियों के उपचार एवं आवश्यकतानुसार उच्च स्वास्थ्य संस्थान में भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। जलजनित बीमारी की स्थिति में जल स्रोत एवं स्वच्छता की जांच, खाद्यजनित बीमारी के मामलों में खाद्य स्रोत की जांच एवं आवश्यक नियंत्रण कार्रवाई, जबकि वाहक जनित बीमारी की स्थिति में वाहक सर्वेक्षण एवं नियंत्रण गतिविधियां संचालित की जाएंगी। पशुजन्य बीमारी के मामलों में पशुपालन विभाग के साथ संयुक्त जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। टीका रोकथाम योग्य बीमारियों की स्थिति में टीकाकरण की स्थिति की जांच, टीके की एक भी खुराक नहीं पाने वाले एवं टीकाकरण से छूटे बच्चों की पहचान तथा आवश्यकता के अनुसार प्रकोप नियंत्रण टीकाकरण कराया जाएगा।
जिला संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल आवश्यकता के अनुसार पंचायत एवं नगरीय निकाय, जलापूर्ति, खाद्य सुरक्षा, पशुपालन, कृषि, वन, पुलिस, शिक्षा सहित संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। प्रकोप की स्थिति में जोखिम संबंधी सूचना प्रसार, जनजागरूकता एवं सूचना-शिक्षा-संचार गतिविधियों को भी सुनिश्चित किया जाएगा। एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच एवं एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम पर वास्तविक समय एवं दैनिक रिपोर्टिंग, आवश्यकतानुसार दैनिक स्थिति रिपोर्ट एवं प्रकोप की स्थिति तैयार कर जिला एवं राज्य निगरानी इकाई को भेजने तथा जांच पूर्ण होने के बाद प्रारंभिक एवं अंतिम प्रकोप जांच रिपोर्ट निर्धारित समय में प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी भी दल को दी गई है। नियंत्रण उपायों की प्रभावशीलता की समीक्षा एवं निगरानी करते हुए प्रकोप के नियंत्रण एवं समाप्ति तक निगरानी जारी रखी जाएगी।
आदेश के अनुसार जिला संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल को संदिग्ध अथवा पुष्ट रोग प्रकोप, मरीजों अथवा मृत्यु के असामान्य समूह, असामान्य अथवा अस्पष्ट चिकित्सकीय स्थिति, संदिग्ध पशुजन्य घटना, खाद्यध्जलध्पर्यावरणीय स्वास्थ्य घटना, उभरती अथवा पुनः उभरती संक्रामक बीमारी, टीका रोकथाम योग्य बीमारी के प्रकोप अथवा ऐसे मामलों में असामान्य वृद्धि तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल या आपदा जैसी परिस्थितियों में सक्रिय किया जा सकेगा। राज्य निगरानी इकाई अथवा शासन से प्राप्त निर्देशों के आधार पर भी दल को सक्रिय किया जा सकता है।
प्रत्येक प्रकोप की स्थिति में दल के सभी सदस्यों का एक साथ क्षेत्र में जाना आवश्यक नहीं होगा। प्रकोप की प्रकृति, संभावित कारण, भौगोलिक विस्तार एवं गंभीरता के आधार पर दल प्रमुख एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा संबंधित विभागों एवं तकनीकी विशेषज्ञों के अधिकारियों को नामित कर विशिष्ट प्रकोप जांच दल का गठन किया जाएगा। सूचना प्राप्त होने के पश्चात यथासंभव 24 घंटे के भीतर क्षेत्रीय जांच प्रारंभ की जाएगी तथा प्रकोप की स्थिति के अनुसार एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच एवं एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम पर प्रतिदिन रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाएगी। संबंधित विभाग आवश्यकता पड़ने पर अपने नामित अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों को संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल की जांच में उपलब्ध कराएंगे। जिला संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल के संचालन के लिए आवश्यक प्रशासनिक, तकनीकी, सामग्री एवं परिवहन संबंधी सहयोग संबंधित शाखा अथवा कार्यक्रम के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।




