मेरठ। मलेशिया में नौकरी दिलाने के नाम पर मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी का मामला सामने आया है।
किठौर के असिलपुर गांव निवासी बब्बर ने आरोप लगाया है कि मुजफ्फरनगर निवासी एक व्यक्ति ने उसे मलेशिया में बादाम पैकिंग का काम दिलाने का झांसा दिया। 70 हजार रुपये मासिक वेतन बताया गया। वहां भेजने की एवज में 1.60 लाख रुपये लिए गए।विदेश पहुंचने के बाद उसे अलग-अलग कंपनियों में बिना वेतन के काम कराया गया और उसका पासपोर्ट भी कब्जे में ले लिया गया। परिवार के करीब दो महीने के प्रयास के बाद एक अगस्त को व्हाइट पासपोर्ट के जरिए भारत लौट सका।बब्बर ने बताया कि जनवरी 2026 में मुजफ्फरनगर के सिखेड़ा निवासी ईशा उनके घर आया था। उसने अपनी ट्रैवल कंपनी होने की बात कहते हुए मलेशिया में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। नौ मार्च को बब्बर ट्रेन से मुंबई पहुंचा, जहां उसे अकेला छोड़ दिया गया। इसके बाद उसे पहले थाईलैंड और फिर मलेशिया पहुंचाया गया।बब्बर का आरोप है कि मलेशिया पहुंचने के बाद शमीम एजेंट ने उसका और अन्य मजदूरों का पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया। बाद में खालिद ने उसे नेपाल के तजिंदर का पासपोर्ट दे दिया। उस पर बब्बर का फोटो लगा हुआ था।
बब्बर के अनुसार, इसके बाद उसे अलग-अलग कंपनियों में काम कराया गया, लेकिन मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया। बब्बर के साथ मुजफ्फरनगर और मेरठ के दानिश, समीर, रमजान, सलमान, सोनू समेत कई अन्य मजदूर भी फंसे हुए थे।
कुछ मजदूरों को टूरिस्ट वीजा पर मलेशिया भेजकर तीन महीने में वर्क परमिट दिलाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन बाद में उनकी मदद नहीं की गई।
मजबूरी में करना पड़ा मांसाहार
भारत लौटे बब्बर ने बताया कि मलेशिया में मजदूरों को मजबूरी में मांसाहार भी करना पड़ा। दलालों पर मारपीट और धमकी देने के भी आरोप लगाए हैं। बब्बर ने मलेशिया से भाई बिल्लू को फोन कर पूरी घटना बताई।
पुलिस और प्रशासन के अलावा नेशनल कैंपेन कमिटी फार इरेडिकेशन आफ बान्डेड लेबर (एनसीसीईबीएल) के कनवीनर निर्मल गोराना को भी मामले की जानकारी दी गई।
संगठन का दावा है कि मामले की शिकायत मेरठ और मुजफ्फरनगर के प्रशासन व पुलिस अधिकारियों के साथ श्रम मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और मलेशिया स्थित भारतीय उच्चायोग को भी भेजी गई।
कई मजदूरों के अब भी मलेशिया में फंसे होने का दावा
एनसीसीईबीएल के अनुसार, कई अन्य मजदूर अभी मलेशिया में फंसे हैं। मुजफ्फरनगर निवासी समीर के मलेशिया की जेल में होने का दावा किया गया है। वहीं, रमजान, दानिश, सलमान और अन्य मजदूरों के भी कथित रूप से वहां फंसे होने की बात कही गई है।
संगठन का आरोप है कि इन मजदूरों को मजदूरी नहीं दी गई और घर वापसी में भी परेशानियां पैदा की जा रही हैं। एनसीसीईबीएल के कनवीनर निर्मल गोराना ने मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष रखा है।





