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49 साल पुरानी ये लोरी है हर मां की पहली पसंद, मुकेश की आवाज और आरडी बर्मन के संगीत में छिपी बचपन की यादें

हिंदी सिनेमा में मां बेटे के रिश्ते को हमेशा से बड़े ही भावुक तरीके से दिखाया गया है. 90 के दशक में रिलीज होने वाली कई मूवी में इन एहसासों को बेहद इमोशनल तरीके से फिल्माया गया है जो काफी पॉपुलर रहे है. इस दशक में रेडियो से लेकर टीवी पर बॉलीवुड फिल्मों के गानों ने दर्शकों को फिल्में देखने पर मजबूर किया.

उस समय  सिनेमा ने हमें सैकड़ों लोरियां दी हैं, जो  समय  के साथ सीधे हमारी रूह में उतर गई और आज भी गुनगुनाने को मजबूर कर देती है. ऐसी ही एक मूवी मुक्ति 1977 में रिलीज हुई  थी , जिसमें  एक ऐसी लोरी थी, जो आज भी सदाबाहर बना  हुआ है. इस गाने के रूप में मां की ममता को बड़े प्यार से दर्शाया गया है. ये लोरी है “लल्ला लल्ला लोरी, दूध की कटोरी.

फिल्म में 2 बार गाई गई है लल्ला लल्ला लोरी

लल्ला लल्ला लोरी, दूध की कटोरी मुक्ति मूवी के उन बेहतरीन गानों में से एक मानी जाती है जो आज भी लोरी के रूप में फैंस की जुबान पर सदाबाहर बने हुए है. इस गाने की एक खासियत है . इस लोरी को फिल्म में 2 बार गाया है, पहली बार शशि कपूर के साथ उनकी बेटी पर इसे फिलमाया गया है और दूसरी बार विघा सिन्हा के जरिए अपनी बेटी को सुलाने की कोशिश करते हुए. पहले वाले गाने में शशि कपूर अपनी बेटी के साथ इस गाने को बड़ी खुशी के साथ गाते है. दूसरे बार विघा सिन्हा ने इस लोरी के जरिए हालातों को जिम्मेदार ठहराया है. 

मुकेश और लता मंगेशकर की आवाज से सदाबाहार बनी लल्ला लल्ला लोरी

इस लोरी को अमर बनाने में तीन दिग्गजों का अहम रोल है. पहले गाने के रूप में गाई जा रही लोरी में एस. डी. बर्मन के  गहरे शब्द, मुकेश की सुरमयी आवाज में गाया गया था.जिसे शशि कपूर और उसकी बेटी पिंकी पर फिल्माया था. वहीं दूसरी बार इस गाने को स्वर कोकिला लता मंगेशकर की मखमली आवाज दी गई. जिससे निकले सुर ने इस लोरी के सुर को बेहद सुरमयी बना दिया. जो आज भी सदाबाहार बनी हुई है. इसे पिंकी की मां का रोल निभा रही विघा सिन्हा पर फिल्माया गया था.

क्या मुक्ति फिल्म की कहानी

1977 में बनी क्लासिक हिंदी फिल्म मुक्ति की कहानी कैलाश शर्मा (शशि कपूर) और उनकी पत्नी सीमा (विद्या सिन्हा) के इर्द-गिर्द घूमती है.कश्मीर में रहने वाले कैलाश शर्मा को एक शक्तिशाली राजनेता के बेटे द्वारा किए गए अपराध में झूठा फंसा दिया जाता है.अदालत उन्हें मौत की सजा सुनाती है.
अपनी अपील खारिज होने के बाद, कैलाश अपनी पत्नी सीमा को बेटी पिंकी के साथ मुंबई (बॉम्बे) जाने और नया जीवन शुरू करने के लिए कहते हैं. मुंबई में नई जिंदगी जीने के दौरान सीमा की मुलाकात अपने पड़ोसी रतन (संजीव कुमार) से होती है, और वह पिंकी के भविष्य के लिए रतन से शादी कर लेती हैं.

वहीं चौदह साल बाद, कैलाश की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया जाता है और रिहा होने के बाद वह अपने परिवार को खोजने मुंबई आता हैं. लेकिन  वह उन्हें दूर खुश देखकर दूर जाने का मन बना लेता हैं, लेकिन सीमा को जब कैलाश के जीवित होने का पता चल जाता है, तो उसकी जिंदगी में एक नया मोड़ आता है. इसी कहानी है इर्द गिर्द चलती है मुक्ति की कहानी.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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