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कुछ घंटों की बारिश में अब नहीं डूबेगा श्रीनगर! ड्रेनेज सिस्टम के लिए मास्टर प्लान तैयार, CM उमर ने दिए निर्देश

श्रीनगर। श्रीनगर में बारिश के बाद बार-बार पैदा होने वाले जलभराव के स्थायी समाधान के लिए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ड्रेनेज नेटवर्क को व्यापक रूप से मजबूत करने की समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने तत्काल राहत के लिए आपातकालीन एसओपी लागू करने, पांच वर्षीय एकीकृत ड्रेनेज योजना को आगे बढ़ाने, प्राकृतिक नालों और जल निकासी मार्गों को पुनर्जीवित करने, अतिरिक्त डी-वाटरिंग स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने तथा सीवरेज और बरसाती पानी की निकासी के नेटवर्क को अलग करने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि शहर का ड्रेनेज सिस्टम इस तरह मजबूत किया जाना चाहिए कि कुछ घंटों की बारिश के बाद शहर को जलभराव का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को श्रीनगर शहर के ड्रेनेज सेक्टर की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक में श्रीनगर नगर निगम (एसएमसी) के आयुक्त फजलुल हसीब ने शहर की मौजूदा जल निकासी व्यवस्था, उसकी कमियों और प्रस्तावित पांच वर्षीय एकीकृत रोडमैप पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

शहर बढ़ा तो ड्रेनेज सिस्टम पड़ा छोटा

प्रस्तुति के अनुसार, श्रीनगर में फिलहाल करीब 680 किलोमीटर का स्टॉर्मवॉटर डीप ड्रेनेज नेटवर्क मौजूद है, जबकि मास्टर प्लान-2035 के तहत प्रस्तावित भविष्य के विकास को देखते हुए लगभग 2,500 किलोमीटर अतिरिक्त ड्रेन नेटवर्क की कमी है।मौजूदा नेटवर्क का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा अपर्याप्त क्षमता, पुराने बुनियादी ढांचे, गाद और ठोस कचरे के कारण पूरी हाइड्रोलिक क्षमता से काम नहीं कर रहा है। तेजी से हो रहे शहरीकरण ने शहर की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ाया है।

भारी बारिश पर तुरंत सक्रिय होगी एसओपी

उमर अब्दुल्ला ने एसएमसी को प्रस्तावित अल्पकालिक उपायों को स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के रूप में अपनाने और समय पर लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भारी वर्षा की चेतावनी मिलते ही एसएमसी को बिना देरी इन उपायों को सक्रिय करना चाहिए, ताकि जलभराव को न्यूनतम किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि तत्काल उपाय जरूरी हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे में निवेश करना होगा। उन्होंने कहा कि ये उपाय कुछ तत्काल समस्याओं को दूर करने में मदद करेंगे, लेकिन बड़ी चुनौती इंफ्रास्ट्रक्चर की है।

उन्होंने एसएमसी को सक्षम एजेंसी की मदद से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने और दीर्घकालिक योजनाओं पर काम शुरू करने को कहा। साथ ही स्पष्ट किया कि डीपीआर किसी अलग-थलग आपातकालीन योजना का हिस्सा नहीं, बल्कि श्रीनगर की समग्र ड्रेनेज योजना का आधार होना चाहिए। सभी संबंधित विभागों को साथ लेकर वित्तीय जरूरतों और उपलब्ध सरकारी संसाधनों के आधार पर फंडिंग मैकेनिज्म तैयार करने के भी निर्देश दिए गए।

प्राकृतिक नालों की बहाली पर जोर

बैठक में प्राकृतिक ड्रेनेज कॉरिडोर के संरक्षण और पुनरुद्धार को महत्वपूर्ण उपाय माना गया। दीर्घकालिक योजना में पुराने और प्राकृतिक नालों का उन्नयन, अतिक्रमण रोकना, अतिरिक्त डी-वाटरिंग स्टेशन बनाना तथा झीलों के संरक्षण और पुनर्जीवन को शामिल किया गया है। सीवरेज नेटवर्क को स्टार्मवॉटर ड्रेनेज से अलग करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

तत्काल उपायों में मौजूदा नालों की सफाई और डी-सिल्टिंग, अवरोध हटाना, ठोस कचरे का दैनिक उठाव, ड्रेनेज नेटवर्क के मिसिंग लिंक को प्राथमिकता से पूरा करना, बड़े खुले नालों में मैकेनिकल स्क्रीन लगाना और डी-वॉटरिंग स्टेशनों के लिए बैकअप बिजली सुनिश्चित करना शामिल है।

पालीथिन पर जनजागरूकता अभियान

मुख्यमंत्री ने ड्रेनेज व्यवस्था को सुचारु रखने में नागरिकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने ठोस कचरे, प्लास्टिक बोतलों और पॉलीथिन के उचित निपटान को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, ‘पॉलीथिन बैग ड्रेनेज सिस्टम के जाम होने का एक बड़ा कारण हैं।’ उन्होंने नालों को कचरे से मुक्त रखने के लिए जनता की सक्रिय भागीदारी की अपील की।

पांच वर्षीय एकीकृत कार्यक्रम को दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में व्यावसायिक और घनी आबादी वाले इलाकों को प्राथमिकता मिलेगी, जबकि दूसरे चरण में निचले क्षेत्रों को कवर किया जाएगा।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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