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छत की लीकेज ने कर रखा है परेशान? पहले इन जगहों को चेक करें, फिर करें रिपेयर

बारिश के मौसम में पुरानी छत से पानी टपकना आम समस्या है. कई बार छत पर कोई बड़ा छेद नजर नहीं आता, फिर भी कमरे की छत या दीवार पर सीलन के निशान दिखने लगते हैं. अगर समय रहते लीकेज की सही जगह पहचानकर मरम्मत कर दी जाए, तो हर बार पूरी छत दोबारा बनवाने की जरूरत नहीं पड़ती.

पहले पता करें पानी कहां से आ रहा है

छत से पानी टपकने पर सबसे पहले कमरे की सीलिंग पर बने गीले निशान को देखकर उसी जगह मरम्मत न शुरू करें. पानी अक्सर छत के किसी दूसरे हिस्से से अंदर आता है और कंक्रीट के रास्ते आगे बढ़कर दूसरी जगह दिखाई देता है. इसलिए छत पर बारीक दरारों, पैरापेट की दीवार, ड्रेन और उन जगहों को ध्यान से देखें जहां बारिश का पानी जमा होता है.

अगर रिसाव की जगह समझ नहीं आ रही है, तो छत के छोटे-छोटे हिस्सों में पानी डालकर जांच की जा सकती है. इससे लीकेज वाली जगह पकड़ने में आसानी होती है.

छोटी दरारों को भी नजरअंदाज न करें

छत पर दिखने वाली बारीक दरारें शुरुआत में छोटी लगती हैं, लेकिन इनके रास्ते पानी धीरे-धीरे अंदर पहुंच सकता है. मरम्मत से पहले दरार में जमा धूल और ढीले कण अच्छी तरह साफ करें. इसके बाद छत के लिए सही क्रैक फिलर या सीलेंट लगाया जा सकता है. जरूरत के हिसाब से इसके ऊपर वॉटरप्रूफ कोटिंग भी की जा सकती है.

हालांकि, अगर दरार काफी चौड़ी या गहरी है, लगातार बढ़ रही है या छत की मजबूती पर सवाल खड़ा कर रही है, तो सिर्फ फिलर लगाना पर्याप्त नहीं होगा. ऐसे मामले में किसी इंजीनियर या विशेषज्ञ से जांच कराना बेहतर है.

पैरापेट और ड्रेन पर खास ध्यान दें

पैरापेट की दीवार और छत का जोड़ लीकेज की आम जगहों में से एक है. इसी तरह ड्रेन के आसपास पानी जमा होने या पुरानी सीलिंग खराब होने से भी रिसाव शुरू हो सकता है. इसलिए इन हिस्सों की नियमित जांच और जरूरत पड़ने पर सीलिंग कराना जरूरी है.

पुरानी वॉटरप्रूफिंग पर सीधे नई परत न लगाएं

अगर छत पर पहले से वॉटरप्रूफिंग लगी है, तो उसके ऊपर तुरंत नई कोटिंग लगाने से पहले पुरानी परत की हालत देखें. अगर वह उखड़ रही है, जगह-जगह फूली हुई है या उसके नीचे नमी फंसी है, तो पहले खराब हिस्सा हटाकर सतह तैयार करनी होगी. इसके बाद ही नई वॉटरप्रूफिंग करना सही रहेगा.

कब पूरी छत की वॉटरप्रूफिंग जरूरी?

अगर लीकेज सिर्फ एक-दो जगह है और बाकी छत ठीक है, तो स्थानीय मरम्मत से काम चल सकता है. लेकिन कई जगहों से पानी आने लगे, पुरानी कोटिंग बड़े हिस्से में खराब हो या हर बारिश में नई लीकेज सामने आए, तो पूरी छत की वॉटरप्रूफिंग पर विचार करना बेहतर है. मरम्मत के बाद सीलेंट और कोटिंग को पूरी तरह सूखने और सेट होने का समय भी जरूर दें

Manoj Mishra

Editor in Chief

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