देश दुनिया

सागर की बेटी चंचल ने रचा इतिहास, SRFTI प्रवेश परीक्षा में AIR-2 हासिल कर बढ़ाया प्रदेश का मान

यह कहावत कि “अगर शौक ही आपका काम बन जाए तो सफलता खुद-ब-खुद कदम चूमती है” सागर की 25 वर्षीय चंचल आठिया पर पूरी तरह सटीक बैठती है. सीमित संसाधनों और एक साधारण किसान परिवार से निकलकर चंचल ने अपनी मेहनत, लगन और अभिनय के प्रति समर्पण के दम पर प्रतिष्ठित सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) की प्रवेश परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 हासिल कर न केवल सागर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है.

इस शानदार सफलता के साथ चंचल का चयन मध्य प्रदेश स्कूल ऑफ ड्रामा (MPSD) और फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (FTII), इटानगर दोनों संस्थानों में हुआ है. यहां से वह अभिनय के क्षेत्र में मास्टर्स की पढ़ाई करेंगी और अपने सपनों को नई दिशा देंगी.

टीवी देखकर करती थीं अभिनय

चंचल आठिया ने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी तरह सरकारी स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने सागर के डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय स्नातक की पढ़ाई पूरी की. बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था. वह जब भी टीवी पर धारावाहिक या फिल्में देखती थीं तो कलाकारों की तरह अभिनय करने की कल्पना करती थीं. धीरे-धीरे यही रुचि उनके जीवन का लक्ष्य बन गई.

थियेटर भी शुरू किया

चंचल बताती हैं कि उन्होंने कक्षा 11वीं में ही तय कर लिया था कि उन्हें अभिनय और रंगमंच के क्षेत्र में ही अपना भविष्य बनाना है. इसके बाद उन्होंने लगातार थिएटर की दुनिया में मेहनत शुरू कर दी. अभिनय के साथ-साथ उन्हें लोक नृत्य में भी विशेष रुचि रही है. रंगमंच और लोक संस्कृति से जुड़े रहने के कारण उनके अभिनय में आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति लगातार मजबूत होती गई.

कई राज्यों में दी परफॉर्मेंस

बीते छह वर्षों से चंचल लगातार थिएटर कर रही हैं. इस दौरान उन्होंने देश के लगभग सभी प्रमुख राज्यों में विभिन्न नाट्य प्रस्तुतियों में भाग लिया और अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रदर्शन किया. लगातार मंच पर काम करने से उन्हें अभिनय की बारीकियों को समझने का अवसर मिला और यही अनुभव आज उनकी इस राष्ट्रीय उपलब्धि का आधार बना.

परिवार ने हमेशा प्रतिभा पर विश्वास जताया

चंचल एक साधारण किसान परिवार से आती हैं. उनके पिता खेती-किसानी करते हैं. परिवार में पांच बहनें और एक भाई हैं. सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा उनकी प्रतिभा पर विश्वास जताया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. चंचल मानती हैं कि यदि परिवार का सहयोग और खुद पर विश्वास बना रहे तो किसी भी कठिन परिस्थिति को पार किया जा सकता है.

अपने संघर्ष को याद करते हुए चंचल ने क्या कहा?

रंगमंच के शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए चंचल कहती हैं कि थिएटर में शुरुआत के समय आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होती. इसी कारण कई प्रतिभाशाली छात्र और कलाकार पार्ट टाइम नौकरी करने लगते हैं और धीरे-धीरे थिएटर से दूर हो जाते हैं, लेकिन उन्होंने कभी नौकरी नहीं की. उन्होंने केवल थिएटर को ही अपना पेशा बनाया और उसी के माध्यम से अपनी आजीविका भी चलाई. उनका कहना है कि संघर्षों ने उन्हें मजबूत बनाया और अभिनय के प्रति उनका समर्पण और बढ़ाया.

सागर में थियेटर अकादमी खोलने की इच्छा

चंचल का सपना केवल एक सफल अभिनेत्री बनना नहीं है, बल्कि वह अपने शहर की बेटियों के लिए भी कुछ करना चाहती हैं. उनका कहना है कि भविष्य में वह सागर में एक ऐसी थिएटर अकादमी स्थापित करेंगी, जहां विशेष रूप से बच्चियों और युवतियों को अभिनय और रंगमंच का प्रशिक्षण दिया जाएगा. साथ ही ऐसा वातावरण तैयार किया जाएगा, जहां प्रशिक्षण लेने वाली छात्राओं को आर्थिक अवसर भी मिल सकें, ताकि उन्हें अपने सपनों और आजीविका के बीच समझौता न करना पड़े.

सागर की धरनी ने दिए कई कलाकार

सागर की धरती पहले भी देश को कई प्रतिष्ठित कलाकार दे चुकी है. मुकेश तिवारी, गोविंद नामदेव और आशुतोष राणा जैसे चर्चित अभिनेता भी डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय से जुड़े रहे हैं और उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई है. अब चंचल आठिया ने भी अपनी इस उपलब्धि से सागर की सांस्कृतिक और कलात्मक परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया है.

चंचल की सफलता से पूरे जिले में खुशी का माहौल है. परिवार, गुरुजनों, रंगकर्मियों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं. उनकी यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटे शहरों से निकलकर बड़े सपने देखते हैं. विशेष रूप से बेटियों के लिए चंचल की सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और आत्मविश्वास अडिग रहे तो किसी भी राष्ट्रीय स्तर की सफलता हासिल की जा सकती है. सागर की इस बेटी ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती, बल्कि उसे ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए केवल समर्पण, संघर्ष और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button