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आईएफसी परियोजना ने बदली जिंदगी : नर्सरी उद्यमी बनकर बनी आत्मनिर्भरता की नई पहचान

रायपुर कभी सीमित संसाधनों के बीच खेती तक सिमटी नीलू वर्मा आज ग्रामीण महिला उद्यमिता की मिसाल बन गई हैं। आईएफसी (इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर) परियोजना से जुड़ने के बाद खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के ग्राम कोहकाबोड़ की नीलू ने नर्सरी व्यवसाय को न केवल सफल बनाया, बल्कि आसपास की महिला किसानों के लिए भी रोजगार और गुणवत्तापूर्ण पौधों का भरोसेमंद केंद्र तैयार कर दिया।

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कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कल गुरुवार को नीलू वर्मा की नर्सरी का निरीक्षण कर उनके प्रयासों की सराहना की। कलेक्टर ने कहा कि कृषि आधारित नवाचार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

नीलू वर्मा ने वर्ष 2025 में आईएफसी परियोजना से जुड़कर नर्सरी उद्यम की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में 30 हजार टमाटर के पौधे तैयार कर उन्होंने छह महिला किसानों को 19,332 पौधे बेचे और पहली ही खेप में 5,790 रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। इसके बाद उन्होंने शासकीय उद्यान नर्सरी, पेंड्री (राजनांदगांव) में प्रशिक्षण लेकर आधुनिक तकनीकों को अपनाया। उद्यानिकी विभाग की 1.70 लाख रुपये की अनुदान सहायता से तैयार नेट संरचना ने उनके उद्यम को नई गति दी।

आज उनकी नर्सरी में टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी और करेला सहित 2.45 लाख से अधिक पौधे तैयार किए जा चुके हैं। इनमें से 96 हजार से अधिक पौधों का विक्रय 30 महिला किसानों को किया गया है, जिससे 1.18 लाख रुपये से अधिक की आय हुई। बढ़ती मांग को देखते हुए नीलू अब रैक सिस्टम आधारित पौध उत्पादन की तैयारी कर रही हैं।

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Manoj Mishra

Editor in Chief

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