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स्टेयरिंग ने बदली जिंदगी : पुनर्वास केंद्र से निकलकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े सुकमा के युवा

सुकमा। कभी भय और अनिश्चितता से घिरे जीवन जीने वाले सुकमा जिले के कई युवाओं के लिए आज नई सुबह की शुरुआत हो चुकी है। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास पहल और जिला प्रशासन के प्रयासों से ये युवा अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनके हाथों में अब बंदूक नहीं, बल्कि रोजगार और सम्मानजनक जीवन की नई उम्मीद है।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), सुकमा द्वारा पुनर्वासित युवाओं के लिए 30 दिवसीय एलएमवी (लाइट मोटर व्हीकल) ऑनर ड्राइवर प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। 13 जून से 12 जुलाई तक चल रहे इस प्रशिक्षण में 31 युवा भाग ले रहे हैं।

प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को केवल वाहन चलाना ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, यातायात नियम, रोड संकेतों की जानकारी और वाहन की सामान्य मरम्मत का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने पर जिला प्रशासन सभी प्रतिभागियों का ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा रहा है, ताकि वे आसानी से रोजगार या स्वरोजगार से जुड़ सकें।

इस प्रशिक्षण से जुड़ी सोड़ी सोमड़ी बताती हैं कि यहां हमें सुरक्षित तरीके से गाड़ी चलाना सिखाया जा रहा है। अब हमें विश्वास है कि हम अपने पैरों पर खड़े होकर सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगे। इसके लिए हम सरकार और प्रशासन के आभारी हैं। इसी तरह पुनेम ज्योति कहती हैं कि रोजाना मिलने वाले प्रशिक्षण से हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है। ड्राइविंग सीखने के बाद हम रोजगार प्राप्त कर अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा सकेंगे।

कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन का उद्देश्य पुनर्वासित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। कौशल विकास, ड्राइविंग प्रशिक्षण और लाइसेंस जैसी सुविधाओं के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। यह पहल साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है। आज सुकमा के ये युवा आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों की ओर बढ़ रहे हैं और अपने साथ-साथ अपने परिवार के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं। यह बदलाव छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास और कौशल विकास योजनाओं की सार्थक सफलता का प्रेरक उदाहरण है।

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Manoj Mishra

Editor in Chief

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