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उपराष्ट्रपति ने लद्दाख के पश्मीना फार्म और सिंधु जल संरक्षण परियोजना का किया दौरा, स्थानीय प्रयासों को सराहा

लद्दाख। भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने अपने लद्दाख दौरे के दौरान उपशी स्थित पश्मीना बकरी फार्म और सिंधु नदी पर बने पहले रॉक चेक डैम का निरीक्षण किया। उन्होंने इन दोनों पहलों को क्षेत्र के सतत विकास, आजीविका संवर्धन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

उपराष्ट्रपति ने पश्मीना बकरी फार्म के दौरे के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अनुभव साझा करते हुए कहा कि लद्दाख की विशिष्ट पश्मीना विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास अत्यंत प्रेरणादायक हैं। उन्होंने कहा कि चांगथांगी नस्ल की बकरियां और उनसे प्राप्त होने वाली विश्व प्रसिद्ध पश्मीना ऊन इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और स्थानीय समुदायों की दूरदर्शिता का प्रतीक हैं।

उन्होंने फार्म की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान न केवल टिकाऊ पशुपालन को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि स्थानीय समुदायों, विशेषकर महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण में भी अहम योगदान दे रहा है। पश्मीना उत्पादन और उससे जुड़े कार्यों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को उन्होंने क्षेत्रीय विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया।

उपराष्ट्रपति ने फार्म से जुड़े वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के समर्पण की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उनके सामूहिक प्रयासों से ग्रामीण आजीविका मजबूत हो रही है, महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक भागीदारी के अवसर बढ़ रहे हैं और देश की एक अनमोल सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है।

अपने दौरे के दौरान राधाकृष्णन ने उपशी में सिंधु नदी पर बने पहले रॉक चेक डैम का भी निरीक्षण किया। यह परियोजना ‘सिंधु जल समृद्धि अभियान’ के तहत विकसित की गई है। उपराष्ट्रपति ने इस पर्यावरण-अनुकूल और कम लागत वाली पहल की सराहना करते हुए इसे जल संरक्षण की दिशा में एक अभिनव प्रयास बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा, “लद्दाख के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने पिछले महीने लद्दाख में पानी की बार-बार होने वाली समस्याओं के एक नए समाधान के तौर पर इसकी योजना बनाई थी और इसका उद्घाटन किया था। यह अनोखा प्रोजेक्ट सिंधु नदी के कम गहरे हिस्सों में पानी का स्तर बढ़ाता है, जिससे किसान बुवाई के अहम मौसम में अपने खेतों की सिंचाई कर पाते हैं। इस तरह के टिकाऊ और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल उपाय पानी की सुरक्षा को काफी मजबूत कर सकते हैं, खेती से जुड़ी आजीविका में मदद कर सकते हैं और इलाके के लंबे समय के विकास में योगदान दे सकते हैं।”

Manoj Mishra

Editor in Chief

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