मंडला: शहर में स्वदेशी उत्पादों की प्रदर्शनी लगी हुई है. यह सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और आत्मनिर्भरता का उत्सव है. मेहनत और मिट्टी की खुशबू से सजी हुनर आर्ट, हथकरघा एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी लोगों को स्वदेशी उत्पादों की ओर आकर्षित कर रही है. मध्य प्रदेश शासन एवं ग्रामोद्योग विभाग के सहयोग से आयोजित यह 5 दिवसीय प्रदर्शनी न केवल शिल्पकारों को मंच दे रही है, बल्कि स्थानीय कला और पारंपरिक हस्तकला को नई पहचान भी दिला रही है. यहां हर स्टॉल पर कारीगरों के हाथों की मेहनत और वर्षों की कला जीवंत दिखाई दे रही है.
सजावटी सामग्रियों ने खींचा लोगों का ध्यान
मंडला जिला के खादी और ग्रामोद्योग प्रबंधक शिव कुमार डेकाटे ने बताया कि “मंडला में आयोजित इस हथकरघा एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी में मंडला के स्थानीय शिल्पियों के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बुनकर और कलाकार अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनी में कोसा और सिल्क की साड़ियां, हस्तनिर्मित कपड़े, लकड़ी से बने आकर्षक सजावटी सामान, वनौषधियों और वनस्पतियों से तैयार खाद्य सामग्री लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं.
यह आयोजन केवल बिक्री का माध्यम नहीं, बल्कि उन मेहनतकश हाथों को सम्मान देने का प्रयास है, जो अपनी कला से भारतीय परंपरा को जीवित रखे हुए हैं. प्रशासन की मंशा है कि स्थानीय शिल्पियों को बाजार उपलब्ध हो, उनका आत्मविश्वास बढ़े और स्वदेशी उत्पादों को नई पहचान मिले. यह प्रदर्शनी ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत की सोच को भी मजबूती दे रही है. ये प्रदर्शनी कारीगरों के लिए एक मंच हैं, जहां उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने और सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है.
है पंसद
बालाघाट से प्रदर्शनी में पहुंचे बुनकर ने बताया कि वे वारासिवनी की प्रसिद्ध कोसा साड़ियां लेकर पहुंचे हैं, जिन्हें जीआई टैग मिलने के बाद देशभर में विशेष पहचान मिली है. कोसा रेशम से बनी साड़ियां अपनी प्राकृतिक चमक और पारंपरिक डिजाइन के कारण बेहद पसंद की जाती हैं. इसके अलावा कॉटन की कुर्ती, सलवार-सूट और हस्तनिर्मित वस्त्र भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं.





