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दरभंगा से मधुबनी तक हर घर की पसंद: मिथिलांचल में ऐसे बनता है करेले का भरवा, एक बार चख लिया तो बार-बार खाएंगे

दरभंगा: मिथिलांचल की रसोई में करेले का भरवा सिर्फ सब्जी नहीं, एक परंपरा है. कड़वे करेले को जब मसालों की चादर ओढ़ाकर तला जाता है, तो स्वाद ऐसा कि गेहूं की पतली रोटी हो या मक्के की मोटी रोटी, हर निवाले के साथ वह निकल ही जाता है. दाल-चावल के साथ भी यह उतना ही जंचता है. सेहत के लिए फायदेमंद और जुबान के लिए लाजवाब यही वजह है कि दरभंगा से मधुबनी तक हर घर में यह खास मौकों पर जरूर बनता है.

मिथिला की गृहिणी रीना चौधरी बताती हैं कि इसे देसी तरीके से बनाने में असली स्वाद आता है. बाजार के इंस्टेंट मसाले में वह बात नहीं होगी. करेले का बीज, प्याज-लहसुन और घर के पिसे मसाले, यही तिकड़ी कमाल करती है.

नोट करें सामग्री
8-10 मध्यम करेले, 2 बड़े प्याज, 8-10 लहसुन कलियां, 2 छोटा चम्मच धनिया पाउडर, 1 छोटा चम्मच हल्दी, 1 छोटा चम्मच मिर्च पाउडर, 1 छोटा चम्मच मीट मसाला, नमक स्वादानुसार, 4 बड़ा चम्मच बेसन, 2 बड़ा चम्मच मैदा, सरसों तेल तलने के लिए.

3 इंच वाले करेले के टुकड़े को लंबाई में हल्का चीरा लगाएं. चम्मच से तैयार मसाला अंदर भर दें. हल्के हाथ से दबाएं ताकि मसाला बाहर न निकले.  एक बर्तन में बेसन, मैदा, चुटकी नमक, हल्दी और मिर्च पाउडर मिलाकर गाढ़ा घोल बनाएँ. भरे हुए करेले को इस घोल में लपेटें.  कड़ाही में सरसों तेल तेज गरम करें. धुआँ उठने पर आँच मध्यम करें. कोटेड करेले सुनहरे होने तक तलें. कुरकुरा होते ही निकाल लें.

गरम-गरम करेले का भरवा तैयार है. इसे मक्के की रोटी और हरी मिर्च परोसे. मिथिला में इसे खूब पसंद किया जाता है. खाने में कड़वाहट गायब मिलेगी और स्वाद लाजवाब होगा. एक बार बना लिया तो हर हफ्ते मांग होगी.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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