बाड़मेर जिले में जहां गर्मी का पारा 44 डिग्री सेल्सियस को छूता है और लू के थपेड़े आम जनजीवन को झुलसा देते हैं, वहां अब फलों के राजा आम की मिठास घुल रही है। जालीपा गांव के एक सेवानिवृत्त शिक्षक करणीदान चारण ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से रेतीले धोरों के बीच एक ऐसा हरा-भरा बगीचा तैयार किया है, जिसे देखकर कृषि विशेषज्ञ भी दातों तले उंगली दबा रहे हैं
तपती रेत में उगाया महंगी किस्म वाला जापानी आम:रिटायर टीचर ने 2020 में शुरू किया मैंगो मिशन, आज बारह किस्मों के आम का बगीचा
बाड़मेर जिले में जहां गर्मी का पारा 44 डिग्री सेल्सियस को छूता है और लू के थपेड़े आम जनजीवन को झुलसा देते हैं, वहां अब फलों के राजा आम की मिठास घुल रही है। जालीपा गांव के एक सेवानिवृत्त शिक्षक करणीदान चारण ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से रेतीले धोरों के बीच एक ऐसा हरा-भरा बगीचा तैयार किया है, जिसे देखकर कृषि विशेषज्ञ भी दातों तले उंगली दबा रहे हैं।
4 हजार का एक पौधा
इस बगीचे की नींव रखने के लिए सिरोही के शिवगंज से उच्च गुणवत्ता वाले पौधे खरीदे थे। एक पौधा करीब 4 हजार रुपए में मिला था। आज उनके खेत में आम के 120 पेड़ों सहित कुल 270 फलदार पौधे हैं।
जापान का मियाजाकी है मुख्य आकर्षण
करणीदान के इस अनोखे बगीचे में आम की 12 दुर्लभ किस्में लहलहा रही हैं। इनमें सबसे खास है जापान की मशहूर प्रजाति मियाजाकी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस आम की कीमत करीब 2.75 लाख रुपए प्रति किलो तक होती है। रेगिस्तान की तपती मिट्टी में इस किस्म का फल देना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है।






