जमशेदपुर. झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा गांव की किसान बेला रानी महतो इन दिनों एक बेहद खास किस्म की मिर्च की खेती को लेकर चर्चा में हैं. इस मिर्च को स्थानीय भाषा में “धान मिर्च” कहा जाता है. नाम भले ही साधारण लगे, लेकिन इसकी पहचान बेहद अलग है. आकार में यह मिर्च नाखून से भी छोटी होती है, मगर इसका तीखापन ऐसा कि अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएं. यही वजह है कि यह छोटी सी मिर्च अब गांव से निकलकर बाजार और होटलों तक अपनी खास जगह बना रही है.
पूरे साल उगती है मिर्च पर देखभाल जरूरी
बेला रानी बताती हैं कि धान मिर्च की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे साल भर उगाया जा सकता है. हालांकि इसकी देखभाल बेहद जरूरी होती है. समय पर सिंचाई न हो तो पौधे जल्दी सूख जाते हैं, लेकिन सही मात्रा में पानी और देखरेख मिले तो यह फसल भरपूर उत्पादन देती है. पौधे छोटे होते हैं, लेकिन उनमें लगने वाली मिर्च की संख्या अच्छी होती है. कम जगह में ज्यादा पैदावार होने से यह छोटे किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है.
मिलती है अच्छी कीमत
इस मिर्च की मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है. बेला रानी बताती हैं कि इसकी कीमत सामान्य मिर्च से काफी ज्यादा मिलती है, कई बार 100 रुपये प्रति किलो से भी ऊपर. गांवों के घरों में तो इसका उपयोग होता ही है, लेकिन खासतौर पर होटल और ढाबों में इसकी काफी मांग रहती है. कारण साफ है, कम मात्रा में ही यह मिर्च खाने में जबरदस्त तीखापन और खास स्वाद जोड़ देती है. रसोइए मिर्च पाउडर की जगह इसका इस्तेमाल करना पसंद करते हैं, जिससे खाने का स्वाद अलग ही स्तर पर पहुंच जाता
संतुलित मात्रा में प्रयोग देता है फायदे
धान मिर्च सिर्फ तीखी ही नहीं, बल्कि खुशबू में भी अलग मानी जाती है. कई लोग मानते हैं कि ताजा धान मिर्च का सीमित मात्रा में उपयोग भूख बढ़ाने और पाचन को सक्रिय रखने में सहायक होता है. हालांकि इसका सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि इसका तीखापन काफी तेज होता है.
बेला रानी महतो जैसी मेहनती महिलाएं यह साबित कर रही हैं कि अगर सही जानकारी और लगन हो, तो छोटी सी खेती भी बड़ी पहचान दिला सकती है. धान मिर्च आज उनके लिए सिर्फ फसल नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी है.





