छपरा: आज शनिवार 24 जनवरी को देश राष्ट्रीय बालिका दिवस ( National Girl Child Day ) मना रहा है। इस अवसर पर हम आपके लिए एक ऐसे पिता की कहानी लेकर आए है, जिन्हें अपनी 7 बेटियों पर गर्व है। उनकी सातों बेटियों की कामयाब की वजह से जिले में ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्र में भी उनका नाम है। हम बात कर रहे हैं सारण जिले के एकमा निवासी कमल सिंह की बेटियों की, लोग इन्हें प्यार से ‘सेवन सिंह सिस्टर’ भी कहते हैं। आइए जानते हैं इनकी पूरी कहानी..
सात बेटियों के पिता हैं आटा मिल मालिक
सारण जिले के एकमा के रहने वाले कमल सिंह एक साधारण आटा मिल संचालक हैं। आर्थिक सीमाओं और सामाजिक तानों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। सात बेटियों के पिता होने के कारण उन्हें समाज की हंसी और दबाव का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने इसे कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया। कमल सिंह ने तय कर लिया था कि उनकी बेटियां पढ़ेंगी, आगे बढ़ेंगी और आत्मनिर्भर बनेंगी।
खुद करवाई बेटियों की तैयारी
कमल सिंह ने अपनी बेटियों की सफलता के लिए असाधारण मेहनत की। वे सुबह 4 बजे से रात 11 बजे तक बेटियों की पढ़ाई और फिजिकल ट्रेनिंग की खुद निगरानी करते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद उनका विश्वास और बेटियों का अनुशासन रंग लाया। आज उनकी सातों बेटियां अपने पिता का नाम रोशन कर रही हैं।
सातों बेटियां बढ़ा रहीं ‘खाकी’ की शान
कमल सिंह की सातों बेटियां ‘खाकी’ की शान बढ़ा रही हैं। सबसे बड़ी बेटी रानी कुमारी सिंह बिहार पुलिस में, रेनू कुमारी सिंह सशस्त्र सीमा बल (SSB) में, सोनी कुमारी सिंह सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) में, कुमारी प्रीति सिंह बिहार पुलिस क्राइम ब्रांच में, कुमारी पिंकी सिंह एक्साइज पुलिस में, कुमारी रिंकी सिंह बिहार पुलिस में और नन्ही सिंह गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) में सेवारत हैं।
‘सिंह सिस्टर पैलेस’ से जताया माता-पिता का सम्मान
अपनी सफलता और कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में सिंह बहनों ने अपने माता-पिता के लिए चार मंजिला मकान बनवाया, जिसका नाम उन्होंने ‘सिंह सिस्टर पैलेस’ रखा। लोग जब भी उनके घर के पास से गुजरते हैं तो कमल सिंह और उनकी बेटियों की तारीफ करने लगे हैं। कमल सिंह का एक बेटा भी है, जिसने बी.टेक की पढ़ाई पूरी की है और वर्तमान में दिल्ली में रह रहा है।
सिंह बहनों की यह कहानी न सिर्फ बिहार, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है। यह साबित करती है कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि वरदान होती हैं, बस उन्हें अवसर और भरोसे की जरूरत होती है।





