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सिकंदर का वो घोड़ा, जिसे कोई काबू नहीं कर पाया… पाकिस्तान में है उसके नाम का शहर

पूरी दुनिया पर राज करने की चाहत रखने वाले सिकंदर महान से जुड़े कई किस्से हैं. इनमें से कुछ के बारे में लोगों को पता भी नहीं होगा. सिकंदर महान कई चीजों के लिए प्रसिद्ध थे. इनमें से एक उनका घोड़ा भी था. क्योंकि, मैसिडोनिया के राजा सिकंदर के विश्वविजयी अभियान में कई युद्धों में जीत दिलाने का श्रेय उनके घोड़े को भी जाता है.

सिकंदर के घोड़े का नाम बुसेफेलास था. उसके साथ सिंकदर का गहरा रिश्ता था. मैसेडोनियाई साम्राज्य के निर्माता को अपने घोड़े से इतना लगाव कैसे हुआ और उसने एक महान शासक की जिंदगी को कैसे प्रभावित किया था, इसे समझने के लिए इतिहास के उन पन्नों को पलटना होगा, जिसमें दोनों के मिलने का जिक्र है. 

घोड़े के नाम पर बसा दिया पूरा शहर 
सिकंदर का घोड़ा थेसालियन नस्ल का था. बुसेफेलास को सिकंदर ने स्वयं वश में किया था. उसके साथ वह किशोरावस्था से लेकर लगभग 30 वर्ष की आयु तक साथ रहा. बीबीसी के हिस्ट्रीएक्स्ट्रा के मुताबिक, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में ग्रीक संस्कृति के प्रोफेसर एमेरिटस, एजी लेवेंटिस पॉल कार्टलेज ने सिकंदर और उसके घोड़े के बीच के रिश्ते की बढ़िया व्याख्या की है326 ईसा पूर्व भारत के शक्तिशाली राजा पोरस हाइडेस्पेस नदी (झेलम नदी) के तट पर मैसेडोनियाई सेना से भिड़ गए थे.  सिकंदर ने इस युद्ध में भी अपने प्रिय घोड़े बुसेफेलास के साथ हिस्सा लिया.  यहां एक भीषण युद्ध हुआ. सिकंदर की सेना 200 हाथियों सहित भारतीय सेना पर विजय तो प्राप्त कर ली, लेकिन उसकी सेना बुरी तरह से पस्त हो गई.

हाइडेस्पेस सिकंदर के पूर्वी अभियान का अंतिम महान युद्ध था. यह सबसे खूनी जंग साबित हुआ. इसने मैसेडोनियाई सेना को टूटने की कगार पर पहुंचा दिया और इसी युद्ध के बाद सिकंदर का घोड़े बुसेफेलास की मृत्यु हो गई. जहां बुसेफेलास की मौत हुई, वो जगह अभई पाकिस्तान में है. उसकी मृत्यु तक सिकंदर और बुसेफेलास दोनों साथ रहे. सिकंदर उसके निधन से इतना आहत हुआ कि उसने सिंधु घाटी में उन्होंने उसके नाम पर एक शहर बसा दिया. इसका नाम बुसेफेलास था.

बुसेफेलास (लगभग 355-326 ईसा पूर्व) इतिहास के सबसे प्रसिद्ध घोड़ों में से एक था और कहा जाता था कि उसे वश में नहीं किया जा सकता था. युवा सिकंदर महान ने उसे वश में किया और कई वर्षों तक अपने प्रिय घोड़े पर सवार होकर अनेक युद्धों में भाग लिया. अंततः पाकिस्तान में स्थित हाइडेस्पेस की लड़ाई के बाद बुसेफेलास की मृत्यु हो गई.

ऐसे सिकंदर को मिला था बुसेफेलास
एक दिन थिस्सली के फिलोनिकस ने फिलिप के लिए बुसेफलस नाम का एक घोड़ा लाया और उसे बेचने की पेशकश की. वे उसे देखने के लिए मैदान में गए और पाया कि वह स्पष्ट रूप से अनियंत्रित था. वह किसी को भी उस पर चढ़ने नहीं देता था. फिलिप के सेवकों के आदेशों का पालन करने से इनकार करता था और जो भी उसके पास आता, उस पर हमला कर देता था. फिलिप को एक अनियंत्रित और हिंसक जानवर की पेश किए जाने पर गुस्सा आया और उसने फिलोनिकस को उसे वापस ले जाने के लिए कहा.

युवा सिकंदर महान ने कहा कि ये लोग कितना अच्छा घोड़ा खो रहे हैं और सिर्फ इसलिए कि उनमें इसे संभालने का दम नहीं है.  फिलिप पहले तो चुप रहे, लेकिन सिकंदर बार-बार कटाक्ष किए जा रहा था. उनकी बातों से दुखी होकर फिलिप ने उनसे पूछा कि क्या तुम्हें लगता है कि तुम अपने बड़ों से ज़्यादा जानते हो? क्या तुम उनकी आलोचना इसलिए करते हो क्योंकि तुम्हें लगता है कि तुम घोड़ों को बेहतर ढंग से संभाल सकते हो? 

ऐसे सिकंदर ने वश में किया था अपना घोड़ा
इस पर सिकंदर ने उत्तर दिया – हां,  कम से कम मैं इसे तो बेहतर ढंग से संभाल सकता हूं. इस पर उनके पिता ने कहा कि अगर तुम नहीं संभाल पाए तो अपनी इस धृष्टता की क्या कीमत चुकाने को तैयार हो? सिकंदर ने कहा मैं घोड़े की कीमत दे दूंगा.  फिर पिता और पुत्र ने शर्तें तय कीं और सिकंदर बुसेफलस के पास दौड़ा, उसकी लगाम पकड़ी और पूरब की दिशा ओर मोड़ दिया. क्योंकि उसने देखा था कि घोड़ा अपनी ही परछाई देखकर घबरा गया था.जब सिकंदर ने देखा कि घोड़ा अब डर से उबर चुका है और सरपट दौड़ने के लिए बेताब है, तो सिकंदर ने उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया, अपनी बुलंद आवाज और एड़ी के चोट मारकर उसे काबू में किया. यह देख फिलिप खुशी से रो पड़े. सिकंदर को चूमा और बोला – मेरे बेटे, मैसेडोनिया तुम्हारे लिए बहुत छोटा है – बेहतर होगा कि तुम अपने आकार का कोई राज्य खोज लो

Manoj Mishra

Editor in Chief

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