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दृष्टिबाधित नहीं, दिव्य दृष्टि से संपन्न हैं बेटियां : संजय अग्रवाल

रायपुर। नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड के अंतर्गत प्रेरणा गुरुकुलम विद्यापीठम्, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, हीरापुर, रायपुर में दृष्टिबाधित छात्राओं के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल शामिल हुए। उन्होंने छात्राओं से संवाद करते हुए उनके आत्मविश्वास, प्रतिभा और योग प्रदर्शन की सराहना की।

संजय अग्रवाल ने कहा कि “ये दृष्टिबाधित नहीं हैं, इनके पास दिव्य दृष्टि है। इनके भीतर जो प्रतिभा, टैलेंट और कला है, वह हर किसी के पास नहीं होती।” उन्होंने कहा कि प्रेरणा गुरुकुलम विद्यापीठम् वर्षों से ऐसी बेटियों को तैयार करने का काम कर रहा है, जो आज अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़कर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ा रही हैं।

योग आयोग को अपने ब्रांड एम्बेसडर मिल गए

उन्होंने कहा कि यहां छात्राओं को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि कंप्यूटर प्रशिक्षण, किचन से जुड़े कार्य, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता से जुड़े विभिन्न कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि बेटियां देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी प्रतिभा और क्षमता के दम पर आगे बढ़ें और अपने साथ-साथ प्रदेश का नाम भी रोशन करें।

“योग आयोग को आज अपने ब्रांड एम्बेसडर मिल गए”

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं द्वारा हास्य योग सहित विभिन्न योग क्रियाओं का शानदार प्रदर्शन किया गया। छात्राओं ने एक साथ, एक लय और अनुशासन के साथ योगाभ्यास प्रस्तुत किया। इस प्रदर्शन से प्रभावित होकर संजय अग्रवाल ने कहा कि सामान्य बच्चों के योगाभ्यास के दौरान अक्सर प्रशिक्षक उन्हें लगातार आसनों के लिए निर्देशित करते दिखाई देते हैं, लेकिन यहां छात्राओं ने बिना किसी दृश्य सहायता के एक साथ एक लय में योग करके सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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उन्होंने कहा, “हम हर चीज के ब्रांड एम्बेसडर खोजते हैं, लेकिन आज मुझे योग आयोग के ब्रांड एम्बेसडर मिल गए हैं। ये बच्चे ही योग आयोग के ब्रांड एम्बेसडर बनेंगे। मैं इसकी घोषणा करता हूं।”

“जब आंखें बंद होती हैं, तब भगवान के दर्शन होते हैं”

संजय अग्रवाल ने छात्राओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि हमें भगवान का धन्यवाद करना चाहिए कि उन्होंने इन बेटियों को दृष्टि भले ही कम दी हो, लेकिन उन्हें ऐसी दिव्य दृष्टि दी है, जिसके माध्यम से वे दुनिया को अपने अलग अंदाज में पहचान और समझ पाती हैं।

उन्होंने कहा कि जब हम भगवान के दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं और कोई पूछता है कि कहां जा रहे हैं, तो हम कहते हैं कि भगवान के दर्शन करने जा रहे हैं। लेकिन भगवान के सामने पहुंचते ही हमारी आंखें बंद हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि जब आंखें बंद होती हैं, तभी भगवान के दर्शन होते हैं और इन बच्चों को भगवान का दर्शन प्राप्त होता है।

40 वर्षों की साधना को बताया प्रेरणादायी

संजय अग्रवाल ने संस्था के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सामान्य बच्चों को भी लंबे समय तक संभालना और उनका मार्गदर्शन करना आसान नहीं होता। ऐसे में लगातार 40 वर्षों से दृष्टिबाधित बच्चों के जीवन को संवारने, उन्हें शिक्षित करने, प्रशिक्षित करने और आत्मनिर्भर बनाने का कार्य करना अपने आप में बड़ी साधना है। उन्होंने कहा कि प्रेरणा गुरुकुलम जैसी संस्थाएं केवल बच्चों को शिक्षा देने का काम नहीं कर रहीं, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानपूर्वक और आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए तैयार कर रही हैं।

जब आंखें बंद होती हैं, तब भगवान के दर्शन होते हैं
जब आंखें बंद होती हैं, तब भगवान के दर्शन होते हैं

कार्यक्रम में आर. वाय. तिवारी, अध्यक्ष शाला समिति, डॉ. राकेश कामरान, सचिव, दलजीत बग्गा, भवन निर्माण समिति, संजीव बसंत, कोषाध्यक्ष, बिंदु बग्गा, सदस्य, राममणि शुक्ला, पतंजलि रायपुर, रविकांत कुंभकार पर्यवेक्षक अधिकारी तथा अनिल जैन, संस्था अध्यक्ष सहित अन्य गणमान्यजन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं के उत्साह, अनुशासन और योग प्रदर्शन ने उपस्थित लोगों को प्रभावित किया। संजय अग्रवाल ने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि प्रतिभा किसी दृष्टि की मोहताज नहीं होती, अवसर और विश्वास मिलने पर यही प्रतिभा दुनिया के सामने अपनी पहचान बनाती है।

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Manoj Mishra

Editor in Chief

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