गुजरात कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी और व्हिसलब्लोअर संजीव भट्ट को जेल में बंद हुए आठ साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर उनके बच्चों आकाशी भट्ट और शांतनु भट्ट ने एक भावुक बयान जारी करते हुए कहा कि उनके पिता ने अपनी अंतरात्मा और सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय सत्ता के खिलाफ खड़े होने का रास्ता चुना, जिसकी कीमत उन्हें अपनी आजादी, करियर और परिवार से दूर रहकर चुकानी पड़ी।
दोनों ने कहा कि 5 सितंबर उनके लिए केवल 2,923 दिनों की जुदाई का दिन नहीं है, बल्कि न्याय के लिए आठ वर्षों से जारी संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता को चुप कराने के लिए उन पर ऐसे आरोप लगाए गए, जिन्हें वे “गढ़े हुए आरोप” मानते हैं। बच्चों के मुताबिक, आठ साल बीतने के बावजूद उनके पिता का हौसला और संकल्प कमजोर नहीं हुआ है।
आकाशी और शांतनु ने अपने बयान में कहा कि उनके पिता ने उन्हें सिखाया कि ऐसे मौके आते हैं जब व्यक्ति को तय करना पड़ता है कि चुप रहने की सुरक्षा ज्यादा महत्वपूर्ण है या अपनी अंतरात्मा की आवाज के लिए खड़ा होना। उन्होंने कहा कि संजीव भट्ट जानते थे कि सत्ता के खिलाफ खड़े होने की लड़ाई बेहद कठिन और अकेली होगी, लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों से पीछे हटने से इनकार किया।





