दुर्गम गांवों में शिक्षा की नई राह, स्कूल केईन्ता अभियान से बदल रही बच्चों की तस्वीर
घमंडी में वैकल्पिक शाला के 22 बच्चों को मिला जाति प्रमाण पत्र, अब 10 किलोमीटर की दूरी नहीं बनेगी पढ़ाई में बाधा
नारायणपुर, अगस्त 2026 // कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में जिले के दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में बच्चों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए संचालित स्कूल केईन्ता अभियान लगातार सकारात्मक परिणाम दे रहा है। अभियान के तहत अब तक 2 हजार से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है तथा दुर्गम क्षेत्रों में 34 नई वैकल्पिक शालाएं शुरू की गई हैं। इन्हीं प्रयासों के तहत अब संकुल केंद्र गारपा अंतर्गत वैकल्पिक प्राथमिक शाला घमंडी के बच्चों को शैक्षणिक सुविधाओं के साथ आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल की गई है। वैकल्पिक प्राथमिक शाला घमंडी में वर्तमान में कुल 30 बच्चे दर्ज हैं। इनमें गत वर्ष नामांकित 22 बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनवाकर उनका वितरण किया गया। इससे बच्चों और उनके अभिभावकों को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में सहायता मिली है तथा भविष्य में शैक्षणिक योजनाओं और विभिन्न सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने का मार्ग भी सुगम होगा।
घमंडी गांव के बच्चों को पहले शिक्षा प्राप्त करने के लिए कोड़ेनार तक लगभग 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। दुर्गम रास्ते और लंबी दूरी के कारण बच्चों के लिए नियमित रूप से विद्यालय पहुंचना एक बड़ी चुनौती थी। बच्चों की इस समस्या को ध्यान में रखते हुए गांव में ही वैकल्पिक प्राथमिक शाला संचालित की जा रही है। शाला के सुचारू संचालन और बच्चों को नियमित शिक्षा से जोड़ने में स्थानीय शिक्षा दूत कोसा राम वड्डे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर शिक्षा की व्यवस्था होने से अब बच्चों को लंबी दूरी तय कर विद्यालय जाने की कठिनाई से राहत मिली है और वे अपने गांव में ही नियमित अध्ययन कर पा रहे हैं। स्कूल केईन्ता अभियान के माध्यम से जिला प्रशासन उन बच्चों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है, जो दूरी और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विद्यालयों तक नहीं पहुंच पाते थे। वैकल्पिक शालाओं की स्थापना के साथ ही बच्चों के नामांकन, आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने और स्थानीय स्तर पर शिक्षा की व्यवस्था जैसे प्रयास अभियान को और अधिक प्रभावी बना रहे हैं।




