छत्तीसगढ़

किसानों, ग्रामीणों और वनांचल के निवासियों से सावधानी बरतने की अपील*

*बारिश के मौसम में सर्पदंश से रहें सतर्क, जिलेभर में विशेष जागरूकता अभियान शुरू*

*अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध, समय पर उपचार से बच सकती है जान*

*किसानों, ग्रामीणों और वनांचल के निवासियों से सावधानी बरतने की अपील*

कवर्धा,  जून 2026। वर्षा ऋतु के आगमन के साथ सर्पदंश की घटनाओं की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन और जिला स्वास्थ्य समिति ने जिलेभर में विशेष जनजागरूकता अभियान शुरू किया है। कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा के निर्देशन में चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों और वनांचल में रहने वाले लोगों को सर्पदंश से बचाव के उपायों तथा समय पर उपचार के प्रति जागरूक करना है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.के. तुरे ने बताया कि बारिश के मौसम में सांप सुरक्षित स्थान की तलाश में खेतों, झाड़ियों, जलभराव वाले क्षेत्रों के साथ-साथ घरों और गोठानों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में खेतों में कार्य करते समय गमबूट या ऊंचे जूते पहनना, झाड़ियों या गड्ढों में हाथ डालने से पहले डंडे से जांच करना तथा रात के समय टॉर्च का उपयोग करना आवश्यक है। उन्होंने घर और आसपास की नियमित साफ-सफाई बनाए रखने, झाड़-झंखाड़ हटाने तथा खुले स्थान या फर्श पर सोने से बचने की भी सलाह दी।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सर्पदंश होने पर घबराने के बजाय पीड़ित को शांत रखें और प्रभावित अंग को यथासंभव स्थिर रखें। प्रभावित स्थान पर चीरा लगाना, जहर चूसने का प्रयास करना, कसकर रस्सी बांधना या झाड़-फूंक जैसे अंधविश्वासों का सहारा लेना नुकसानदायक हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना देर किए पीड़ित को निकटतम शासकीय स्वास्थ्य संस्थान पहुंचाना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर 108 या 112 पर कॉल कर निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा का लाभ लिया जा सकता है। जिले के सभी शासकीय अस्पतालों में सर्पदंश के उपचार के लिए प्रशिक्षित चिकित्सा दल तथा पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) उपलब्ध है। समय पर उपचार मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है। जिला प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों, विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों, मितानिनों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से सर्पदंश से बचाव संबंधी जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार करने की अपील की है। जागरूकता, सतर्कता और समय पर चिकित्सा ही सर्पदंश से होने वाली मौतों और गंभीर जटिलताओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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