देश दुनिया

आठ फीट का पेड़, सालभर आम की बहार, घर के किचन गार्डन और छत पर गमले में लगाएं यह प्रजाति

मेरठ। इन दिनों आम की बहार है। बाजारों में दशहरी, लंगड़ा, चौसा और गुलाब जामुन जैसी पारंपरिक किस्मों की भरमार है। इसी बीच एक ऐसी खास प्रजाति भी चर्चा में है, जो न सिर्फ स्वाद में अलग है, बल्कि अपने अनोखे गुणों के कारण शहरी बागवानी का नया ट्रेंड बनती जा रही है। यह है थाइलैंड से आई आल टाइम मैंगो प्रजाति।यह एक ऐसा आम का पौधा है जो सालभर फल देने की क्षमता रखता है, जिसकी ऊंचाई महज आठ फीट तक सीमित रहती है। खास बात यह है कि इसे घर की छत, बालकनी या छोटे से किचन गार्डन में भी आसानी से लगाया जा सकता है।किठौर के शाहजहांपुर में नफीस नर्सरी संचालित करने वाले मुस्तफीज खान बताते हैं कि इस पौधे की मांग तेजी से बढ़ रही है। करीब डेढ़ फीट के पौधे की कीमत 150 रुपये है और इसे साल के किसी भी समय गमले में लगाया जा सकता है। वह बताते हैं कि पौधा तीन से चार फीट की ऊंचाई पर पहुंचते ही फल देना शुरू कर देता है, जो इसे अन्य आम की किस्मों से अलग बनाता है।

थाइलैंड मैंगो की एक और खासियत इसकी लंबी उम्र है। जमीन पर लगाने पर यह पेड़ 100 साल से अधिक समय तक जीवित रह सकता है। कम फैलाव और नियंत्रित ऊंचाई के कारण इसकी देखभाल भी अपेक्षाकृत आसान होती है। हालांकि खट्टापन अधिक होने की वजह से इसका व्यावसायिक उपयोग नहीं है लेकिन घरेलू बागवानी और सजावट में इसकी मांग बढ़ रही है।

इसका रंग रूप दशहरी की तरह होता है लेकिन लंबाई में केले के आकार की होती है। शास्त्रीनगर निवासी दीपक वर्मा ने इस पौधे को शाहजहांपुर की नर्सरी से खरीदा था, उन्होंने इसे घर की छत पर गमले में लगा रखा है। दीपक का कहना है कि आम में मिठास के बजाय बेहद तीखापन और खट्टापन है, लेकिन दिखने में जरूर आकर्षक लगता है। इससे बागवानी की शोभा बढ़ती है।

जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार के अनुसार, पारंपरिक आम के पेड़ जहां काफी बड़े और फैलावदार होते हैं, वहीं यह प्रजाति सीमित जगह के लिए उपयुक्त है। थाइलैंड मैंगो कम ऊंचाई और सीमित फैलाव के कारण किचन गार्डन या छत पर गमले में आसानी से लगाया जा सकता है।

यह सजावटी बागवानी के साथ-साथ उपयोगी भी है। शहरों में सीमित जगह और बढ़ती हरियाली की जरूरत के बीच थाइलैंड मैंगो उन लोगों के लिए खास विकल्प बनकर उभरा है, जो अपने घर में ही आम का पेड़ लगाना चाहते हैं। छोटा आकार, सालभर फल और आसान रखरखाव की वजह से यह विदेशी मेहमान अब स्थानीय बागवानी का हिस्सा बनता जा रहा है।

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button