गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) में कोचों (बोगियों) की गणना पूरी हो गई है। मंगलवार को दिन भर मुख्यालय गोरखपुर समेत लखनऊ, वाराणसी और इज्जतनगर मंडल के स्टेशनों, यार्डों, कारखानों और पटरियों पर बोगियां खाेजी गईं। इंडियन कोच मैनेजमेंट सिस्टम (आइसीएमएस) पर की गई ऑनलाइन गणना में पूर्वोत्तर रेलवे में करीब पांच हजार बोगियां मिली हैं।यह सभी बोगियां सिस्टम पर आनलाइन हो गई हैं। जिसमें मुख्यालय गोरखपुर जंक्शन, यार्ड, यांत्रिक कारखाना और कैंट स्टेशन पर लगभग 550 बोगियाें की गणना की गई है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए हर कोच की जीओ टैगिंग के माध्यम से फोटो ली गई और उसका डेटा रेलवे के साफ्टवेयर पर रियल टाइम में अपलाेड किया गया। इस गणना में हर ट्रेन के हर कोच की वर्तमान स्थिति, निर्माण की तारीख और रखरखाव का रिकॉर्ड अपडेट किया गया है।
रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देश पर पूर्वोत्तर रेलवे समेत भारतीय रेलवे स्तर पर अभियान चलाकर एक साथ आनलाइन बोगियों की गणना करायी गई है। जानकारों का कहना है कि यह गणना दस वर्ष बाद हो जा रही है। इस गणना से भारतीय रेलवे स्तर पर ट्रैक के साथ ट्रेन की क्षमता बढ़ेगी। रेलवे के सामने अब सभी बोगियां होंगी।संबंधित विभाग और अधिकारी यह जान सकेंगे कि उनके पास कितनी बोगियां हैं, नई हैं या पुरानी। उस हिसाब से ट्रेनों का संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। यही नहीं कोचों की समय से मरम्मत के अलावा मांग के अनुसार नए कोचों का डिमांड भी किया जा सकेगा।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि 32 महत्वपूर्ण पैमानों पर कोचों की गणना कराई गई है। गणना का महत्वपूर्ण उददेश्य बोगियों का डेटाबेस अपडेट करना, मरम्मत योग्य कोचों की पहचान करना और भविष्य के लिए योजना बनाना है।
वर्तमान में भारतीय रेलवे स्तर पर परंपरागत आइसीएफ (इंटिग्रल कोच फैक्ट्री) और आधुनिक एलएचबी (लिंक हाफमैन बुश) दो तरह के कोच चल रहे हैं। परंपरागत आइसीएफ कोचों का उत्पादन पूरी तरह बंद हो गया है। अब सिर्फ एलएचबी कोच ही बन रहे हैं। सभी ट्रेनों में एलएचबी कोच ही चल रहे हैं।
कुछ पैसेंजर ट्रेनों में आइसीएफ कोच लग रहे हैं। 15 से 20 साल की उम्र पूरी करने वाले आइसीएफ कोचों का उपयोग आटोमोबाइल की ढुलाई के लिए न्यू माडिफाइड गुड्स (एनएमजी) कोच के रूप में किया जा रहा है।





