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धमतरी के गंगरेल बांध का होगा मेगा मेकओवर, 65.5 करोड़ रुपए की मंजूरी, सीपेज खत्म करने और सुरक्षा बढ़ाने पर जोर

धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में करीब 45 साल पुराने रविशंकर सागर जलाशय (गंगरेल बांध) के मरम्मत के लिए राज्य सरकार ने 65 करोड़ 50 लाख रुपये की बड़ी मंजूरी दी है. यह फैसला बांध में बढ़ते सीपेज (जल रिसाव) और उससे जुड़े संभावित खतरे को देखते हुए लिया गया है.

धमतरी का गंगरेल बांध, जिसे रविशंकर सागर जलाशय के नाम से भी जाना जाता है, अब जल्द ही और मजबूत और सुरक्षित बनाया जाएगा. स्वीकृत 65.5 करोड़ रुपये की राशि से बांध की मरम्मत, आंतरिक संरचना को सुदृढ़ करने और सबसे अहम सीपेज रोकने के कार्य किए जाएंगे.

10 फीसदी पानी बेकार जा रहा

दरअसल, लंबे समय से हो रही सीपेज की समस्या के कारण बांध का करीब 10 फीसदी पानी बेकार बह जाता है. इससे न केवल जल संसाधनों का नुकसान होता है, बल्कि बांध की सुरक्षा पर भी खतरा बना रहता है. कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वर्षा ऋतु से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएं. ताकि समय पर कार्य शुरू हो सके.

कई जरूरी काम होंगे

कलेक्टर ने टेंडर प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है. इस परियोजना के तहत कई जरूरी मरम्मत कार्य किए जाएंगे.

  • VPD की सफाई (चोक पाइप खोलना): ‘VPD’ एक तरह का पाइप या नाली जैसा सिस्टम होता है जो पानी के दबाव को कम करने के लिए बनाया जाता है. समय के साथ इसमें कचरा जमा हो जाता है. इसे साफ़ करने के लिए हाई प्रेशर वॉटर जेट (तेज़ धार वाला पानी) का इस्तेमाल किया जाएगा, जो एक लचीली रॉड के ज़रिए पाइप के अंदर तक जाकर गंदगी को बाहर निकाल देगा.
  • Epoxy Grouting (दरारें भरना):अगर कंक्रीट या दीवार में कहीं दरारें आ गई हैं, तो उसमें ‘एपॉक्सी’ (एक बहुत मज़बूत गोंद जैसा पदार्थ) भरा जाएगा. यह दरारों को सील कर देता है ताकि पानी न रिसे और ढांचा मज़बूत रहे.

पूरे प्रदेश के लिए गंगरेल बांध है लाइफलाइन

वर्ष 1978 में निर्मित यह बहुउद्देशीय जलाशय आज भी क्षेत्र की जीवनरेखा बना हुआ है. यह हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई, धमतरी के साथ ही आसपास के इलाकों में पेयजल आपूर्ति, औद्योगिक उपयोग और 11.2 मेगावाट बिजली उत्पादन में भी भूमिका निभा रहा है.

विशेषज्ञों के अनुसार, समय के साथ बांधों में सीपेज की समस्या सामान्य है, लेकिन हाई टेक्नीक और नियमित रखरखाव से इसे नियंत्रित किया जा सकता है. प्रस्तावित कार्यों से बांध की आंतरिक संरचना मजबूत होगी.

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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