अब क्रासिंग पार करते समय यदि ट्रेन का ड्राइवर सीटी बजाना भूल गया तो चिंता की बात नहीं है। क्योंकि आरडीएसओ द्वारा विकसित ‘कवच’ के माध्यम से इंजन रेल क्रासिंग के 600 से 850 मीटर पहले ही सीटी बजाकर सभी को सावधान कर देगा और किसी भी हादसे की संभावना समाप्त हो जाएगी। कवच का ट्रायल चल रहा है और यह 18 फरवरी तक पूरा होगा।दिल्ली, हावड़ा और लखनऊ रेलमार्गों पर स्थित समपार रेल क्रासिंगों पर निकलने के पहले किसी कारणवश चालक-सह चालक संकेतक मिलने के बाद भी सीटी बजाना भूल जाता है तो अब हादसा नहीं होगा। समपार रेल क्रासिंग आने के 600 से 850 मीटर पहले जैसे ही ट्रेन पहुंचेगी, वैसे ही इंजन में लगे स्वचालित सिस्टम के जरिए सीटी बजने लगेगी। क्रासिंग पार होने के बाद चालक को ध्यान आया तो बंद कर देगा या फिर ऑटोमेटिक सिस्टम से सीटी बजना अपने आप बंद हो जाएगी।
कानपुर से दिल्ली के बीच कवच के तहत इसका ट्रायल 18 फरवरी तक पूरा हो जाएगा। यह ट्रायल 160 किमी की गति से किया जा रहा है। एनसीआर के अधीन कानपुर सेंट्रल के कवच से जुड़े अफसरों ने बताया कि 160 किमी की गति से कवच का पहले चरण का ट्रायल पूरा हो चुका है। दूसरे चरण में सोमवार से बुधवार तक टूंडला से दादरी के बीच हो रहा है। इस आधुनिक व्यवस्था से ट्रेनों का संचालन तो सुरक्षित होगा ही, साथ ही ट्रेनों की गति भी 160 किमी प्रति घंटा बढ़ जाएगी। अभी ट्रेनों की गति अधिकतम 130 किमी प्रति घंटा ही है।
इंजनों में डिवाइस लगनी शुरू
सोमवार से बुधवार तक कानपुर-दिल्ली रूट पर डब्ल्यूएपी-5 और डब्ल्यूएपी-7 इंजनों और कोच लगाकर ट्रायल किया गया है। इसके बाद यह सिस्टम जोन के सभी यात्री इलेक्ट्रिक इंजनों में डिवाइस लगाई जाएगी। यह काम भी जल्द होगा। कई इंजनों में इसे लगाया जा चुका है।
कवच पूरी तरह से स्वदेशी
रेलवे में कवच पूरी तरह से स्वदेशी है। इसे अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) ने विकसित किया है। एक तरह से यह बाहरी खतरों से रोकने जैसे कि ट्रेनें टकराने की घटनाओं पर अंकुश लगाने का ऑटोमेटिक सिस्टम है। इसे मूल रूप से सिग्नल ओवरशूट होने पर या फिर चालक की मानवीय भूल से रेड सिग्नल पार करने जैसी घटनाओं को खत्म करने के लिए विकसित किया गया है। इस आधुनिक सुरक्षा प्रणाली को लागू करने के लिए ट्रायल शुरू किया गया है।इसे लेकर सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि एनसीआर में कवच के जरिए पूरी तरह से संचालन सुरक्षायुक्त होगा। समपार रेल क्रासिंगों पर मानवीय चूक से यदि ट्रेन की सीटी नहीं बजती है लेकिन ऑटोमेटिक सिस्टम से सीटी बजेगी तो किसी तरह का कोई हादसा नहीं होगा। घने कोहरे में भी कवच से सुरक्षित ट्रेन संचालन होगा
विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आ रही है। मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक सुलभ, पारदर्शी और दिव्य बनाने के लिए ‘हाईपावर्ड मैनेजमेंट कमेटी’ ने कई क्रांतिकारी फैसलों पर मुहर लगा दी है। अब भक्त अपने आराध्य के और भी करीब से दर्शन कर सकेंगे। मैनेजमेंट कमेटी की 12वीं बैठक में न केवल दर्शन के स्वरूप को बदलने पर मंथन हुआ, बल्कि मंदिर की सजावट से लेकर ठाकुर जी के विग्रह की स्थिति तक को लेकर ऐसे निर्णय लिए गए हैं, जिनसे वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा।
जगमोहन’ में दर्शन: श्रद्धालुओं के लिए बढ़ेगी सुगमता
अभी तक ठाकुर बांके बिहारी जी के दर्शन गर्भगृह से होते हैं, लेकिन अब कमेटी उन्हें ‘जगमोहन’ (गर्भगृह के बाहर का हिस्सा) में विराजमान करने पर विचार कर रही है। दरअसल, बांके बिहारी जी का विग्रह ‘चल विग्रह’ माना जाता है। यदि ठाकुर जी जगमोहन में विराजमान होते हैं, तो दर्शन का दायरा बढ़ जाएगा और दूर खड़े भक्त भी बिना किसी धक्का-मुक्की के आसानी से निहार सकेंगे। कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अशोक कुमार ने बताया कि इससे मंदिर का कुप्रबंधन समाप्त होगा और शरद पूर्णिमा जैसा दिव्य अनुभव भक्तों को आम दिनों में भी मिल सकेगा।बसपा सुप्रीमो मायावती यूपी के साथ ही देश के अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव तैयारियों में जुट गई हैं। बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए संगठन में व्यापक फेरबदल किया है। राज्यों के प्रभारियों के साथ यूपी में मंडलीय कोआर्डिनेटरों के दायित्वों में बदलाव किया गया है। पार्टी में वापसी के बाद आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को दिल्ली के साथ चार राज्यों का दायित्व देकर उनका कद बढ़ा दिया गया है। यूपी के कोआर्डिनेटरों को निर्देश दिया गया है कि वे संगठन को मजबूत करने में जुट जाएं और काम न करने वालों के दायित्वों में बदलाव भी किया जाए।
सीएम योगी ने सोमवार को की गई इस पोस्ट में लिखा- ‘मेरे प्रिय विद्यार्थियों, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं कल से प्रारंभ हो रही हैं। आप सभी को मेरा शुभाशीष। परीक्षाएं केवल आपकी शैक्षणिक योग्यता का मूल्यांकन नहीं हैं, बल्कि यह आपके धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास की भी परीक्षा है। पूर्ण विश्वास है कि आपने वर्ष भर जो कठिन परिश्रम किया है, उसका सकारात्मक परिणाम आप सभी को अवश्य प्राप्त होगा। माँ सरस्वती की कृपा आप सभी पर बनी रहे।’





