दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि बैंक अकाउंट को पूरी तरह और गलत तरीके से फ्रीज करना, खासकर जब अकाउंट होल्डर न तो आरोपी हो और न ही संदिग्ध, तो यह “पूरी तरह से मनमाना” है और भारत के संविधान के आर्टिकल 21 और 19(1)(g) का उल्लंघन करता है।
जस्टिस पुरुशैन्द्र कुमार कौरव ने कहा,
“बैंक अकाउंट को पूरी तरह या गलत तरीके से फ्रीज करना, खासकर जब अकाउंट होल्डर जांच के तहत अपराध में न तो आरोपी हो और न ही संदिग्ध, तो यह पूरी तरह से मनमाना है। भारत के संविधान के आर्टिकल 19(1)(g) और 21 के तहत मौलिक अधिकारों के खिलाफ है, जिसमें आजीविका का अधिकार और व्यापार और व्यवसाय करने की स्वतंत्रता शामिल है।”
कोर्ट ने कहा,
“बिना किसी मिलीभगत के सबूत के इस तरह मनमाने तरीके से डेबिट फ्रीज करने का नतीजा यह होता है कि एक निर्दोष कंपनी के रोज़मर्रा के बिजनेस ऑपरेशन ठप हो जाते हैं, जिससे कमर्शियल गुडविल का नुकसान होता है और वित्तीय परिणाम भुगतने पड़ते हैं, जिससे बिना किसी मिलीभगत वाले अकाउंट होल्डर को दंडात्मक परिणाम भुगतने पड़ते हैं।”
जस्टिस कौरव मालाबार गोल्ड एंड डायमंड लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें केंद्र सरकार के दो बैंकों को जारी किए गए निर्देशों को चुनौती दी गई, जिसके तहत कंपनी के बैंक अकाउंट को होल्ड पर रखने या फ्रीज करने का निर्देश दिया गया।
2024-25 में मालाबार गोल्ड ने डलास ई-कॉम इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड नाम के एक ग्राहक के साथ लगभग 14.2 करोड़ रुपये का सोने का लेनदेन किया। बाद में कुछ लोगों ने उक्त ग्राहक के खिलाफ धोखाधड़ी या साइबर-अपराध की शिकायत की, लेकिन मालाबार गोल्ड के खिलाफ कोई FIR या शिकायत नहीं थी।
इसके बाद एजेंसियों ने दोनों बैंकों को मालाबार गोल्ड के अकाउंट में कुछ रकम को “होल्ड पर” रखने या फ्रीज करने के लिए कहा, इसे अपराध की संदिग्ध कमाई माना गया।
पिछले साल 28 मार्च तक मालाबार गोल्ड के बैंक अकाउंट में लगभग 80,10,857 रुपये फ्रीज कर दिए गए, भले ही कंपनी को आरोपी या संदिग्ध के रूप में नहीं दिखाया गया। उक्त कार्रवाई के कारण मालाबार गोल्ड ने कहा कि वह अपने कर्मचारियों को सैलरी देने या रोज़मर्रा के बिजनेस खर्चों को पूरा करने के लिए अपने पैसे का इस्तेमाल नहीं कर पा रही थी। मलाबार गोल्ड को राहत देते हुए कोर्ट ने कहा कि मलाबार गोल्ड के खिलाफ कोई शिकायत नहीं थी और अधिकारी उक्त कंपनी की किसी भी मिलीभगत को साबित नहीं कर पाए।
जज ने कहा,
“याचिकाकर्ताओं की किसी भी मिलीभगत के अभाव में विभिन्न रकम को लगातार फ्रीज करने और रोकने से याचिकाकर्ताओं को नुकसान हुआ है। याचिकाकर्ता नंबर 1 अपने कर्मचारियों को ज़रूरी सैलरी देने और अपने बिज़नेस को सुचारू रूप से चलाने के लिए अपने रोज़मर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए अपने फंड का इस्तेमाल करने में असमर्थ हो गया।”
कोर्ट ने निर्देश दिया कि मलाबार गोल्ड के बैंक खातों को तुरंत डीफ्रीज किया जाए। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई भी प्रवर्तन या जांच एजेंसी कंपनी के खिलाफ जांच शुरू करने का प्रस्ताव करती है या जांच कर रही है तो वह BNSS के प्रावधानों के अनुसार ऐसा करने के लिए स्वतंत्र होगी, यह देखते हुए कि मलाबार गोल्ड ने ऐसी जांच में पूरी तरह से सहयोग करने का वादा किया।





