बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में भी शनिवार को 20 महिलाओं सहित 30 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है। सीआरपीएफ के पुलिस महानिरीक्षक बीएस नेगी और बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव के सामने इन नक्सलियों ने सरेंडर किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस आत्मसमर्पण पर कहा कि यह बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में हमारी निरंतर कोशिशों का सकारात्मक परिणाम है।
आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर 85 लाख रुपए का इनाम था। सरेंडर करने वालों में कंपनी नंबर 2 और 7 के पीपीसीएम, एरिया कमेटी सदस्य और जनताना सरकार के अध्यक्ष जैसे प्रभावशाली पदों पर तैनात माओवादी शामिल हैं। पुनर्वास के दौरान इन्होंने कार्डेक्स वायर और 50 जिलेटिन स्टिक भी सुरक्षा बलों को सुपुर्द किए।
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने इस सफलता को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सुरक्षा कैंपों की स्थापना और सड़क कनेक्टिविटी ने माओवादियों के आधार क्षेत्र को सिकोड़ दिया है। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट संकेत है कि संगठन अब आंतरिक रूप से बिखर रहा है। वहीं बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने ‘पूना मारगेम’ (नई सुबह) नीति का हवाला देते हुए कहा कि यह नीति आत्मसमर्पित कैडरों के सुरक्षित और स्वावलंबी भविष्य की गारंटी देती है। शासन की नीति के तहत प्रत्येक कैडर को 50 हजार रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
बस्तर के विकास से भटके युवा लौट रहे मुख्यधारा में : सीएम साय
30 नक्सलियों के सरेंडर पर सीएम साय ने कहा कि बीजापुर में 30 माओवादी कैडरों ने “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के तहत आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है, इन पर 85 लाख से अधिक का इनाम घोषित था। पिछले दो वर्षों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं सहित समग्र विकास को बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया गया है, जिसने भटके युवाओं को हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने को प्रेरित किया है, जो सुशासन की नीति की प्रभावशीलता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विज़न, गृह मंत्री अमित शाह जी के संकल्प और राज्य सरकार के सतत प्रयासों से बस्तर तेज़ी से विकसित बस्तर की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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