बाराबंकी: आज के समय में किसान तेजी से पारंपरिक फसलों से हटकर ऐसी खेती की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें कम लागत लगे और कम समय में बेहतर मुनाफा मिल सके. मौसम और बाजार की मांग को देखते हुए अब किसानों का रुझान सीजनल सब्जियों की खेती की तरफ बढ़ता जा रहा है. इन्हीं सब्जियों में सलाद पत्ता ( Salad Patta Farming) एक ऐसी फसल बनकर उभरी है, जो बेहद कम समय में तैयार होकर किसानों को अच्छी कमाई दे रही है.
सलाद पत्ता की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी फसल मात्र 30 से 40 दिनों में तैयार हो जाती है. इससे किसान साल में कई बार इसकी पैदावार ले सकते हैं. साथ ही बड़े-बड़े होटल, रेस्टोरेंट और फास्ट फूड चेन में इसकी मांग लगातार बनी रहती है, जिससे बाजार में इसके दाम भी अच्छे मिलते हैं.
सलाद पत्ता की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी
सलाद पत्ता की अच्छी पैदावार के लिए रेतीली दोमट और दानेदार दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होना जरूरी है, ताकि पानी जमा न हो. सही मिट्टी और उचित देखभाल से इसकी गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर होते हैं.जिले के मंजिठा गांव के रहने वाले किसान अकबर अली ने पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सलाद पत्ता की खेती की शुरुआत की. शुरुआत में उन्होंने इसे एक प्रयोग के तौर पर अपनाया, लेकिन अच्छा मुनाफा मिलने के बाद अब यह उनकी आय का बड़ा जरिया बन गई है.
आज अकबर अली करीब आधे एकड़ में सलाद पत्ता की खेती कर रहे हैं और एक फसल से 60 से 70 हजार रुपए तक का मुनाफा कमा रहे हैं.कम लागत में ज्यादा मुनाफा
किसान अकबर अली ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि वह कई सालों से पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों की खेती कर रहे हैं. इनमें बैंगन, गोभी और टमाटर जैसी फसलें शामिल हैं.
उन्होंने बताया कि इस समय उनके पास करीब आधे एकड़ में सलाद पत्ता लगा हुआ है. इसकी मांग बड़े-बड़े होटल और रेस्टोरेंट में ज्यादा रहती है, जिस वजह से यह अच्छे दामों पर बिक जाता है. लागत की बात करें तो एक बीघे में करीब 5 से 6 हजार रुपए खर्च आते हैं, जबकि एक फसल पर मुनाफा 60 से 70 हजार रुपए तक हो जाता है.
सलाद पत्ता की एक खास बात यह भी है कि इसकी बिक्री में किसी तरह की परेशानी नहीं होती. फसल तैयार होते ही इसे स्थानीय मंडियों, होटल-रेस्टोरेंट या सीधे थोक विक्रेताओं को आसानी से बेचा जा सकता है.
सलाद पत्ता की खेती की आसान विधि
सलाद पत्ता की खेती करना ज्यादा मुश्किल नहीं है. सबसे पहले खेत की दो से तीन बार अच्छी तरह जुताई की जाती है. इसके बाद खेत में गोबर की खाद का छिड़काव किया जाता है. फिर खेत को समतल कर सलाद पत्ता के बीजों की बुवाई की जाती है.
जब पौधे निकल आते हैं, तब समय-समय पर सिंचाई की जरूरत होती है. बुवाई के करीब 35 से 40 दिनों बाद फसल पूरी तरह तैयार हो जाती है और कटाई के बाद बाजार में बेचने के लिए भेजी जा सकती है.
सलाद पत्ता की खेती उन किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आई है, जो कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं. कम लागत, जल्दी तैयार होने वाली फसल और बाजार में अच्छी मांग इसे किसानों के लिए फायदे का सौदा बनाती है.





