कोरबा: जिला सेनानी(डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट) कार्यालय में सोमवार को नगर सैनिकों(होम गार्ड) ने जमकर प्रदर्शन किया. नगर सैनिकों ने अपने कमांडेंट अनुज कुमार एक्का पर कई आरोप लगाए. नगर सैनिकों का कहना है कि कमांडेंट उन्हें कई तरह से प्रताड़ित करते हैं. उनसे मजदूरों से भी ज्यादा मेहनत वाला काम कराया जाता है. महिला नगर सैनिकों ने भी कमांडेंट पर कई आरोप लगाए.
कोरबा जिले में लगभग 300 नगर सैनिकों की नियुक्ति है. यह सभी विभिन्न सरकारी कार्यालय, छात्रावासों में अपने सेवाएं देते हैं. सोमवार को यह सभी हड़ताल पर रहे. दोपहर को शुरू हुआ आंदोलन देर शाम तक चला. नगर सैनिकों ने आरोप लगाया कि उनकी ड्यूटी प्रशासन के अधिकारियों के घर पर लगाई जाती है, जहां उनसे खाना पकाने, कपड़े और बर्तन धोने जैसे काम लिए जाते हैं. जिससे वे लगातार प्रताड़ित हो रहे हैं.
आक्रोशित नगर सैनिकों ने अपनी सेवा में सुधार और डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट के स्थानांतरण की मांग की. प्रदर्शन की सूचना मिलते ही बिलासपुर से संभागीय कमांडेंट को भी कोरबा के जिला सेनानी कार्यालय में आना पड़ा.
“लगातार झेल रहे हैं प्रताड़ना “
जिला सेनानी में बतौर नगर सैनिक सेवा दे रहे दिलीप रात्रे ने बताया कि हम लगातार समस्याओं से घिरे हुए हैं. हमारी बहुत सारी समस्याएं हैं और समय-समय पर हम इसे संज्ञान में भी लाते हैं, जिला सेनानी का हम स्थानांतरण चाहते हैं. यह हमें चारों तरफ से प्रताड़ित कर रहे हैं. आर्थिक मानसिक हर तरह से प्रताड़ित कर रहे हैं. हमसे मजदूर जैसा काम लिया जा रहा है. फावड़ा चलाने को कहा जाता है. हमारी स्थिति मजदूरों से भी ज्यादा बदतर है. अधिकारियों के घर पर हमारी ड्यूटी लगा दी जाती है. जहां खाना पकाने से लेकर बर्तन कपड़ा, धोने जैसे काम भी हमें करना पड़ता है.
नगर सैनिक ने आरोप लगाया कि उनकी सेवा पुस्तिका खराब किये जाने का प्रयास किया जा रहा है. ताकि 3 साल बाद उन्हें जो सुविधाएं दी जाना है उसे रोका जाए. उन्होंने कहा कि 3 साल बाद जो सुविधाएं मिलनी हैं यदि वह नहीं मिलेगी तो नगर सैनिक परेशान होकर आएंगे और फिर पैसे वसूलने का मौका मिलेगा.
प्रेग्नेंट महिलाओं से कहते हैं यह मेरी नहीं तुम्हारी प्रॉब्लम
महिला नगर सैनिक प्रीति राजवाड़े ने बताया “हमारी मुख्य समस्या हमारे अधिकारी जिला कमांडेंट हैं. ऐसे कमांडेंट हमें जिले में नहीं चाहिए, वैसे तो काफी सारी समस्या है. लेकिन जो मुख्य समस्याएं हैं, वो बताती हूं. हॉस्टल में हमारी ड्यूटी 8 घंटे की होती है, लेकिन हमें 24 घंटे रहने के लिए बोलते हैं. 8 घंटे वर्दी पहन के रहो और उसके बाद बिना वर्दी कर ड्यूटी करो, तो हम लोग अपने परिवार और अपने बच्चों को कब समय दे पाएंगे. हम अपने बच्चों को कब पढ़ाएंगे. जब हम यहां लाइन(कार्यालय) आते हैं. तब हमें ढेरों काम दिया जाता है, हमें ठेका दिया जाता है. कहा जाता है कि फावड़ा चलाकर काम समाप्त करने का टारगेट दिया जाता है, नहीं करोगे तो पेशी होगी कहते हैं. “
महिला नगर सैनिक ने आगे कहा- “आधा घंटा हम बाहर नहीं जा पाते, लंच तक नहीं कर पाते, सीधे 5 बजे जाने के लिए कहा जाता है. प्रेग्नेंट महिलाओं को भी कहा जाता है कि तुम्हारा पेट नहीं दिख रहा है, तुम प्रेग्नेंट कैसे हो. तुम प्रेग्नेंट हो तो यह तुम्हारी प्रॉब्लम है, मेरी नहीं. परेड तो करना ही पड़ेगा. इस तरह से हमें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है.”
“दोषी पर होगी कार्रवाई”
नगर सैनिकों के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही बिलासपुर से संभागीय कमांडेंट को कोरबा के जिला सेनानी कार्यालय में आना पड़ा. संभागीय कमांडेंट नरसिंह नेताम ने कहा “नगर सैनिकों ने आंदोलन किया है. जिसकी मैं जानकारी ले रहा हूं. वह अपने कमांडेंट से नाखुश हैं. यह अनुशासन का मामला है, यदि अधिकारी गलत होंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी और यदि नगर सैनिकों ने अनुशासनहीनता बरती है तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी.”
ज्ञापन मिला है, की जाएगी जांच
मौके पर पहुंचे एसडीम सरोज महिलांगे ने बताया कि नगर सैनिकों ने अपने कमांडेंट के खिलाफ आंदोलन किया है. वह काफी देर से धरने पर बैठे हुए हैं, वह अपने कमांडेंट के ट्रांसफर की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि वह उन्हें लगातार प्रताड़ित करते हैं और भी कई तरह की शिकायतें हैं. इस संबंध उन्होंने ज्ञापन सौंपा है. ज्ञापन के बिंदुओं के आधार पर जांच की जाएगी, इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी.





