रायपुर। छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कांगेर वैली नेशनल पार्क बस्तर को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। यह राज्य का पहला स्थल है, जिसे यूनेस्को की सूची में स्थान मिला है। इस कैटेगरी में स्थान पाने वाला छत्तीसगढ़ का इकलौता साइट बना है। कहा जा रहा है कि, अब अगले साल नॉमिनेशन लिस्ट में जगह बनाने की कोशिश होगी। नॉमिनेशन लिस्ट में आने पर कांगेर वैली का स्थाई सूची में स्थान बन जाएगा। टेंटेटिव लिस्ट में नाम आने पर मंत्री ओपी चौधरी ने पोस्ट किया है और इसे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक पल बताया है।

बता दें कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन ने पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग भारत सरकार को इस सबंध में प्रस्ताव भेजा था। प्रबंधन ने प्रस्ताव भेज कर दावा किया है कि विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल करने के लिए यूनेस्कों द्वारा स्थापित 10 मापदंडों को राष्ट्रीय उद्यान पूरा करता है। इन मापदंडों में जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास, महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी और जैविक प्रक्रियाओं, असाधारण सार्वभौमिक मूल्य आदि शामिल हैं, जिन्हें यह राष्ट्रीय उद्यान पूरा करता है। अब कांगेर वैली के लिए खुशखबरी आई है। अब कांगेर वैली को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की अस्थायी सूची में शामिल कर लिया गया।
वित्तमंत्री ओपी चौधरी बोले- ऐतिहासिक पल
कांगेर वैली नेशनल पार्क बस्तर को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की अस्थायी सूची में शामिल करने पर वित्तमंत्री ओपी चौधरी खुशी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर यह जानकारी साझा करते हुए इसे ऐतिहासिक पल बताया है। उन्होंने लिखा है कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण। कांगेर घाटी की जैव विविधता व सुंदर जलप्रपात इसे अनमोल बनाते हैं।
जानिए अपनी कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को
यह राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ के जगदलपुर एवं दरभा विकासखंड में लगभग 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है। इसे वर्ष1982 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था। यह राष्ट्रीय उद्यान मनभावन तीरथगढ़ जलप्रपात से प्रारम्भ होकर ओडिशा राज्य की सीमा से होकर बहने वाली कोलाब सबरी नदी तक विस्तृत है। इस राष्ट्रीय उद्यान के बीचोबीच कांगेर नदी प्रवाहित होती है, जिसके नाम पर इस राष्ट्रीय उद्यान का नाम पड़ा है। यह छत्तीसगढ़ का पहला राष्ट्रीय उद्यान है जिसे युनेस्को की विश्व धरोहर की आस्थाई सूची में शामिल किया गया।
जैव विविधता व प्राकृतिक सौंधर्य से भरपूर
यह राष्ट्रीय उद्यान जैव विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य, गुफाओं, झरनों एवं जलप्रपातों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। इस राष्ट्रीय उद्यान में ऊंचे पहाड़, गहरी घाटियां, विशाल पेड़ और मौसमी जंगली फूलों एवं वन्यजीवन की विभिन्न प्रजातियां पायी जाती हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान में मिश्रित नम पर्णपाती प्रकार के वन जैसे- साल ,सागौन , टीक और बांस आदि पाए जाते हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान की सबसे लोकप्रिय पक्षी और छत्तीसगढ़ का राज्य पक्षी बस्तर मैना है जो अपनी मधुर आवाज से सभी को मंत्रमुग्ध करने के लिए जानी जाती है। इस राष्ट्रीय उद्यान में ड्रिपस्टोन, फ्लोस्टोन तथा चूना पत्थर की गुफाएँ स्थित हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान में तीन गुफाएं कुटुम्बसर, कैलाश और दंडक-स्टेलेग्माइट्स और स्टैलेक्टसाइट्स पायी जाती हैं।
राष्ट्रीय उद्यान के प्रमुख वन्यजीव
इस राष्ट्रीय उद्यान में बाघ, तेंदुए, माउस हिरण, जंगली बिल्ली, चीतल, सांभर, भौंकने वाला हिरण, सियार, लंगूर, रीसस मकाक, सुस्त भालू, उडऩे वाली गिलहरी, जंगली सूअर , धारीदार लकड़बग्घा, खरगोश, अजगर, कोबरा, मगरमच्छ, मॉनिटर छिपकली और साँप, पहाड़ी मैना, चित्तीदार उल्लू, लाल जंगली मुर्गी, रैकेट-टेल्ड ड्रोंगो, मोर, तोते, स्टेपी ईगल, लाल स्परफॉवल, फाक्टा, भूरा टीटर, ट्री पाई और बगुला आदि पाए जाते हैं।
भारत में कुल 42 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
भारत में कुल 42 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं, जिनमें 34 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित धरोहर स्थल हैं। यूनेस्कों की विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल भारतीय प्राकृतिक स्थलों में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, असम (1985), मानस वन्यजीव अभयारण्य, असम (1985), केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, राजस्थान (1985), सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान, पश्चिम बंगाल (1987), नंदा देवी और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान,उत्तराखंड (1988, 2005), ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क संरक्षण क्षेत्र, हिमाचल प्रदेश (2014) व पश्चिमी घाट (2012) शामिल हैं।
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