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वो अफसाना जिसे अंजाम तक

-दीपक रंजन दास
भारतीय विवाह क्यों टिके रहते हैं, इसका कोई सीधा-सादा जवाब देना मुश्किल है। क्या कुण्डली बता देती है कि यह जोड़ा सही सलामत रहेगा और संतानोत्पत्ति कर अपना जीवन पूर्ण करेगा? क्या शादियां इसलिए टिकी रहती हैं कि यह सात जन्मों का बंधन है और अग्नि को साक्षी रखकर सात फेरे लिये जाते हैं? या इसलिए शादियां टिकी रहती थीं कि पत्नी के पास ससुराल छोड़कर जाने के लिए कोई जगह नहीं होती थी या समाज इसे सहज स्वीकृति नहीं देता था? पर जैसे-जैसे महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं, वैसे-वैसे वह अपने फैसले खुद ले रही हैं। नये दौर का मानना है कि बेमानी रिश्तों को जबरदस्ती ढोते रहने का कोई मतलब नहीं है। इससे उभय पक्ष कुंठा में जीता है और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफल रहता है। ऑस्कर विजेता अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संगीतकार एआर रहमान और उनकी पत्ना ने 29 साल के वैवाहिक जीवन को खत्म करने का निर्णय ले लिया। उनके वकील ने बताया कि टेंशन की वजह से यह फैसला लिया गया। सायरा की वकील ने कहा, ‘भावनात्मक तनाव और कठिनाइयों ने उनके बीच एक ऐसी खाई पैदा कर दी है, जिसे भरने में कोई भी इस समय सक्षम महसूस नहीं कर रहा है।Ó कितनी अच्छी बात है, पर कितनों को यह सुविधा हासिल है। सबसे पहले तो परिवार और समाज ही समझाने के लिए बैठ जाएगा कि इससे खानदान की नाक कट जाएगी। बच्चों पर बुरा असर पड़ेगा। रहमान दंपति की तीन संतानें हैं। दो बेटिया खतीजा और रहीमा तथा बेटा अमीन। बच्चों ने भी सोशल मीडिया पर कहा कि उन्हें उम्मीद है कि लोग उनके पेरेंट्स की प्रिवेसी का सम्मान करेंगे। हालांकि, यह कोई पहला परिवार नहीं है जिसने ऐसा फैसला किया। देश के कुछ समाजों में ऐसे विवाह विच्छेदों को सहजता से स्वीकार किया जाता है।

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