बांका। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुनीं गई बांका की शिक्षिका खुशबू कुमारी अभी खूब चर्चा में हैं। शिक्षक दिवस के दिन वह राष्ट्रपति भवन पहुंच कर पुरस्कार प्राप्त करेंगी।
खुशबू कटोरिया प्रखंड के राधानगर गांव की रहने वाली है। दरअसल, इस गांव की कहानी खुशबू की सफलता से भी बड़ी है।
गांव में अधिकांश वैश्य परिवार के लोग पीढ़ियों से रहते हैं। चार दशक पूर्व तक गांव के अधिकांश लोग अपने परंपरागत व्यापार से परिवार चलाते थे। गांव का पढ़ाई से कोई वास्ता नहीं था।
तराजू वाले हाथों में थमाई कलम
ऐसा कहें कि आठवें दशक तक गांव में मुश्किल से कोई मैट्रिक पास था। इस बीच गांव के सरकारी विद्यालय में एक शिक्षक राधारमण सिन्हा आए। वे चांदन पांडेयडीह के रहने वाले थे। उन्होंने तराजू वाले हाथों में कलम थमा दी
उनकी मेहनत से गांव में ज्ञान की ऐसी रौशनी जली कि घर-घर में लक्ष्मी के साथ सरस्वती का वास हो गया। नई पीढ़ी के लोगों ने अब तराजू से तौबा कर लिया है।
वे पूरी तरह कलम के पुजारी बन गए हैं। इससे दो-तीन दशक में ही पूरे गांव की तस्वीर बदल गई। मैट्रिक पास करने को तरसे गांव में एक दर्जन से अधिक शिक्षक हो गए हैं।
विकास कुमार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं तो डॉ. सुमन कुमार टीएनबी कॉलेज में प्रोफेसर हैं। एक प्रोफेसर एसएम कॉलेज में भी है।
यूपीएससी की इंजीनियरिंग परीक्षा में एक लड़का सफल हुआ है। गांव में दर्जन भर बैंकर्स और इंजीनियर हैं। कुंदन कुमार सेक्सन ऑफिसर हैं तो विकास कुमार लोको पायलट हैं।
ललन कुमार व चंद्रशेखर मंडल गांव के ही विद्यालय में शिक्षक बन गए हैं। जूली, दीपक, चंदन सहित कई युवाओं को लगातार सफलता मिली है। कई लोग पुलिस में भी हैं।
राधा रमण के नाम पर गांव का नाम
ज्ञान की ऐसी रौशनी फैलने पर गांव वालों से अपने गुरुजी राधा रमण सिन्हा को 1978 में राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने पर गांव का नामकरण ही उनके नाम पर राधानगर कर दिया





