पहाड़ों में लगातार बढ़ती बंजर भूमि और घटती खेती की चुनौती से निपटने के लिए उद्यान विभाग ने एक नई पहल शुरू की है। विभाग का लक्ष्य क्लस्टर आधारित योजना के तहत बंजर होते गांवों को विकसित कर उन्हें फलपट्टी के रूप में स्थापित करना है। इस पहल से गांवों में हरियाली लौटने, किसानों की आय बढ़ने और पलायन पर रोक लगने की उम्मीद है।
इस योजना के तहत, उद्यान विभाग क्रय एवं निःशुल्क फलदार पौध रोपण योजनाओं को एकीकृत करेगा। इसका उद्देश्य पूरे गांव को सामूहिक रूप से फल उत्पादन से जोड़ना है। ग्रामवासियों को एक साथ अपनी बंजर या अनुपयोगी भूमि पर फलदार पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे बड़े क्षेत्र में संगठित फल उत्पादन संभव हो सके।
केंद्र प्रभारी कमल किशोर पंत ने बताया कि इच्छुक ग्राम सभाएं समय रहते उद्यान विभाग से संपर्क कर प्रस्तावित स्थल की जानकारी उपलब्ध कराएं। विभाग द्वारा संबंधित क्षेत्र का जियो टैगिंग कर उसे योजना में शामिल किया जाएगा। चयनित गांवों को चरणबद्ध तरीके से फलपट्टी के रूप में विकसित किया जाएगा।
पंत ने कहा कि सामूहिक प्रयास से तैयार होने वाली फलपट्टियां भविष्य में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार का मजबूत आधार बनेंगी। इससे बंजर भूमि का सदुपयोग होगा, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा सेब, अखरोट, नाशपाती, प्लम, आड़ू और माल्टा जैसे फलदार पौधों के माध्यम से किसानों की आमदनी में भी वृद्धि होगी।
उद्यान विभाग ने क्षेत्र की ग्राम सभाओं से इस महत्वाकांक्षी अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। विभाग का मानना है कि यदि ग्रामीण एकजुट होकर इस योजना से जुड़ते हैं, तो आने वाले वर्षों में बंजर गांव फलों से लहलहाते नजर आएंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।





