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बारिश के मौसम में लकड़ी के महंगे फर्नीचर को फंगस और सीलन से कैसे बचाएं?

बारिश का मौसम भला किसे पसंद नहीं, तपती गर्मी के बाद जब मानसून आता है, तो चाय-पकौड़े का मजा ही कुछ और होता है. लेकिन इस सुहावने मौसम के साथ एक बड़ी समस्या भी आती है, और वो है सीलन और फंगस. ​अगर आपके घर में महंगा वुड का फर्नीचर है, तो बारिश के दिनों में आपकी धड़कनें थोड़ी बढ़ जाती होंगी. सोफे के कोनों पर सफेद रंग की फंगस जमना, अलमारी से अजीब सी बदबू आना या दराजों का टाइट हो जाना ये सब इस मौसम की आम परेशानियां हैं. अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो लाखों का फर्नीचर चंद दिनों में बर्बाद हो सकता है.

अगर आप भी अपने महंगे फर्नीचर को खराब होने से बचाना चाहते हैं, तो इन आसान और असरदार तरीके अपना सकते हैं.

बारिश में महंगे फर्नीचर को सीलन से बचाने के उपाय-

​1. दीवार से दूरी- 

​बारिश के दिनों में घर की दीवारें सबसे ज्यादा नमी सोखती हैं. अगर आपका कीमती सोफा, बेड या अलमारी सीधे दीवार से सटकर रखी है, तो दीवार की सीलन तुरंत लकड़ी में ट्रांसफर हो जाएगी.

​क्या करें- अपने भारी और महंगे फर्नीचर को   से कम से कम 6 से 7 इंच आगे खिसका कर रखें. इससे हवा आर-पार होती रहेगी और नमी नहीं जमेगी.

कपूर और नैफ्थलीन बॉल्स- 

 के अंदर कपड़ों और लकड़ी को फंगस से बचाना सबसे बड़ा टास्क होता है. इसके लिए आपकी किचन और पूजा घर की चीजें काम आ सकती हैं.

​क्या करें- अलमारी के कोनों में नैफ्थलीन की गोलियां या कपूर के टुकड़े रख दें. कपूर नमी को सोख लेता है और इसकी खुशबू से फंगस वाले कीड़े और कीटाणु दूर भागते हैं.

सिल्का जेल-

​जब आप नया जूता या पानी की बोतल खरीदते हैं, तो उसके अंदर एक छोटा सा कागज का पाउंड निकलता है, जिस पर ‘Silica Gel’ लिखा होता है. इसे कभी भी बेकार समझकर फेंकें नहीं.

​क्या करें- सिल्का जेल के पाउच नमी को सोखने में उस्ताद होते हैं. इन्हें अपनी अलमारी, दराजों या महंगे कैबिनेट के अंदर रख दें. यह हवा की एक्स्ट्रा नमी को अपने अंदर खींच लेते हैं और फंगस लगने का चांस कम हो जाता है.

वेंटिलेशन और धूप- 

​बरसात में जब भी तेज धूप निकले, तो इस मौके को हाथ से न जाने दें.

​क्या करें- धूप निकलने पर घर की खिड़कियां खोल दें ताकि ताजी हवा और रोशनी अंदर आ सके. अगर मुमकिन हो, तो छोटे फर्नीचर को कुछ देर के लिए हल्की धूप में रख दें. घर के अंदर हवा का फ्लो (Ventilation) अच्छा रहेगा, तो सीलन टिक नहीं पाएगी.

 

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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