फतेहपुर
पूर्व मध्य रेलवे ने गया-कोडरमा रेलखंड के सबसे चुनौतीपूर्ण माने जाने वाले गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन में एक नया इतिहास रच दिया है। सुरंग, तीखे ढलान और पहाड़ी चुनौतियों के बीच मालगाड़ी संचालन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।तकनीकी उन्नयन के बाद ऐतिहासिक ग्रैंड कॉर्ड सेक्शन में खुलीं भारी माल ढुलाई की नई संभावनाएं बढ़ी है। धनबाद मंडल अंतर्गत इस कठिन रेल मार्ग की डाउन लाइन पर पहली बार बॉबर रेक संचालन की सफलता के बाद पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने स्वयं फुटप्लेट निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने रेल सुरक्षा, परिचालन व्यवस्था और घाट सेक्शन में मालगाड़ियों के संचालन से जुड़ी तकनीकी परिस्थितियों का गहन अवलोकन किया। इस अवसर पर धनबाद रेल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अखिलेश मिश्रा समेत कई वरिष्ठ रेल अधिकारी मौजूद रहे। निरीक्षण को रेलवे के लिए बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है।
1.80 का तीव्र ढलान, बड़ी चुनौती गौरतलब है कि ग्रैंड कॉर्ड रेल लाइन का निर्माण ब्रिटिश काल में हुआ था और इसका उद्घाटन वर्ष 1906-07 में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड मिंटो द्वारा किया गया था। गुरपा-गझंडी घाट खंड इसी ऐतिहासिक रेल मार्ग का हिस्सा है, जो अपनी कठिन भौगोलिक संरचना के कारण लंबे समय से रेलवे इंजीनियरिंग की चुनौती बना हुआ है। इस सेक्शन में 1:80 का तीव्र ढलान, तीन सुरंगें, ऊंचे तटबंध और छोटी-छोटी पहाड़ियां रेल संचालन को बेहद जटिल बनाती हैं।
स्वतंत्रता पूर्व की बनी है सुरंगें रेल अधिकारियों के अनुसार स्वतंत्रता पूर्व निर्मित इस खंड में सुरंगों की सीमित ऊंचाई और संरचनात्मक बाधाओं के कारण लंबे समय तक बॉबर वैगनों का संचालन संभव नहीं हो सका था। बॉबर वैगनों की अधिक ऊंचाई और तकनीकी आवश्यकताओं को देखते हुए इस रूट पर इनके परिचालन में कई व्यावहारिक कठिनाइयां आती थीं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में रेलवे द्वारा ट्रैक उन्नयन, आधारभूत संरचना सुधार और सुरक्षा मानकों में व्यापक बदलाव किए गए। इसके परिणामस्वरूप अब इस चुनौतीपूर्ण घाट सेक्शन पर बॉबर रेक का सफल संचालन संभव हो पाया है।





