छत्तीसगढ़

पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध, किसानों से वैज्ञानिक विकल्प अपनाने की अपील*

*पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध, किसानों से वैज्ञानिक विकल्प अपनाने की अपील*

कवर्धा,  अप्रैल 2026। जिला कबीरधाम के कृषि विभाग ने समस्त कृषक बंधुओं से खेतों में पराली (फसल अवशेष) न जलाने की अपील की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि फसल कटाई के बाद पराली जलाना पूर्णतः प्रतिबंधित है और यह पर्यावरण व मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।
विभागीय जानकारी के अनुसार पराली जलाने से वायु प्रदूषण में वृद्धि होती है, मृदा की उर्वरता घटती है तथा खेतों में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा आग लगने की घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इन दुष्प्रभावों को देखते हुए किसानों से इस प्रथा को पूरी तरह त्यागने का आग्रह किया गया है। कृषि विभाग ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के वैज्ञानिक विकल्प अपनाने की सलाह दी है। इसके तहत हैप्पी सीडर एवं सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम जैसे कृषि यंत्रों का उपयोग, अवशेषों से कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट बनाना, मल्चिंग करना तथा पशु आहार के रूप में उपयोग करना शामिल है। साथ ही विभाग द्वारा संचालित योजनाओं में उपलब्ध सब्सिडी का लाभ उठाने को भी कहा गया है।
उप संचालक कृषि ने बताया कि पराली जलाना पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों के तहत दंडनीय अपराध है। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना सहित अन्य दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। कृषि विभाग ने सभी कृषकों से पर्यावरण संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य संवर्धन के लिए सहयोग करने तथा सतत कृषि पद्धतियां अपनाने की अपील की है।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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